नयी दिल्ली, 26 मार्च (वार्ता) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों की कड़ी आलोचना की है। उन पर केरल के मुख्यमंत्री के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी करने और पार्टी की धर्मनिरपेक्ष पहचान पर सवाल उठाने का आरोप लगाया है।
माकपा पोलित ब्यूरो ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों का मकसद आने वाले विधानसभा चुनाव में “सस्ता चुनावी लाभ” उठाना है। बयान में कहा गया है, “भाजपा के बजाय माकपा पर निशाना साधकर कांग्रेस नेता सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के अपने दावे से मुकर रहे हैं। केरल के लोग इस खतरनाक एजेंडा को समझ जायेंगे।”
पार्टी ने कई राज्यों में भाजपा में शामिल होने वालों का हवाला देते हुए कांग्रेस की राजनीतिक साख पर भी सवाल उठाया। बयान में आगे कहा गया, “असम के मौजूदा भाजपा मुख्यमंत्री पिछली कांग्रेस सरकार में अहम पद संभाल चुके हैं। त्रिपुरा में वाम मोर्चा को हराने के लिए 2018 में पूरा कांग्रेस नेतृत्व भाजपा में शामिल हो गया था। भाजपा के कई केंद्रीय मंत्री और सांसद पहले कांग्रेस के बड़े नेता थे। कांग्रेस अब भाजपा को दूध पिलाने वाला संगठन बन गया है।” वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार के तहत केरल के रिकॉर्ड पर माकपा ने उल्लेख किया कि पिछले दस वर्षों के दौरान राज्य में कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है, जो संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) शासन के दौरान हुई मराड दंगे जैसी घटनाओं के बिल्कुल विपरीत है।
बयान में आगे कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा गया कि उसने अल्पसंख्यक कट्टरपंथी ताकतों के साथ गठबंधन किया है। पार्टी ने दावा किया, “हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनावों सहित केरल के विभिन्न चुनावों में कांग्रेस-लीग-भाजपा का नापाक गठजोड़ बेनकाब हो चुका है।” केंद्रीय जांच एजेंसियों के मुद्दे पर माकपा ने राहुल गांधी पर पाखंड का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा, “लोकसभा में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का हवाला देते हुए एक विपक्षी मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस ने इसी तरह दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की भी मांग की थी। यह उनके अवसरवादी रुख को उजागर करता है।” बयान में केरल की जनता से एलडीएफ सरकार की उपलब्धियों को पहचानने का आह्वान करते हुए कहा गया, “केरल के लोग, जिन्होंने पिछले दस वर्षों में एलडीएफ शासन के तहत अभूतपूर्व विकास और सांप्रदायिक सद्भाव देखा है, वे कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और भाजपा के नेतृत्व वाले राजग दोनों को करारा जवाब देंगे।”

