
साक्षी केसरवानी
भोपाल: जयप्रकाश जिला अस्पताल में कभी अस्पताल की व्यवस्थाओं के मामले में तो कभी मरीजों के इलाज के मामले में कोताही बरत रहा है. मंगलवार को महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों के साथ लापरवाही का किस्सा सामने आया. वार्ड में भर्ती मरीजों और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार मरीज चार दिन से भर्ती है और उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। ठंड और बुखार से कराहती मरीज के परिजन सुबह 11 बजे से ड्यूटी इंचार्ज को ढूंढते रहे, लेकिन कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं मिला। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर 1 बजकर 33 मिनट पर इंचार्ज पहुंची। तो उसने मरीज को देखने तक की जहमत नहीं उठाई। वहीं परिजन के बताये अनुसार दवा लिखकर पर्चा थमा दिया और फोन पर बात करने में लगी रही.
नहीं चढ़ाई आयरन, खुद ही बंद करे ड्रिप
4 दिन से मरीज भर्ती है रोजाना कभी इंचार्ज को तो कभी डॉक्टर को ढूढ़ना पड़ता है. यहां तक कि ग्लूकोज चढ़ते समय खतम हो जाये तो ड्रिप की नॉब भी खुद ही बंद करनी पड़ती है. कोई नर्स स्टॉफ नहीं आता. वहीं डॉक्टर ने भर्ती के पहले दिन ही जांच के बाद रिपोर्ट देखकर नर्स को आयरन चढ़ाने को बोला था, लेकिन आज 5वें दिन चढ़ा रहे हैं.
संदीप लोधी, परिजन
रात के साढ़े 1 बजे नहीं मिली एम्बुलेंस
मैं करीब रात के साढ़े 12 बजे अस्पताल अपनी बेटी के साथ बागमुगलिया से यहां एम्बुलेंस से पहुंची. मेंरे पैरों में सूजन बहुत ज्यादा थी. चलने की हालत में नहीं थी. एमरजेंसी में डॉक्टरों ने देख तो लिया लेकिन भर्ती करने से मना करते हुये करीब साढ़े 1 बजे मुझे जाने को कहा. एम्बुलेंस मांगी तो मना कर दिया, कहा ये सब नहीं मिलता जैसे जाना हो जाओ. बेटी की बड़ी मिन्नतों के बाद मुझे एडमिट किया. वहीं आज कोई परिजन साथ न होने पर कोई नर्स या स्टॉफ एक्सरे और ब्लड जांच को नहीं आया, खुद ही सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ा.
रानी चौधरी, मरीज
खबर का असर:
जेपी अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम ये बना हुआ है कि आए दिन कोई न कोई समस्या मरीजों की परेशानी का कारण बनी रहती है. वहीं 21 मार्च को नवभारत रिपोर्टर ने अस्पताल में पीने के पानी के पास की गंदगी को लेकर खबर प्रकाशित की थी. जिसके बाद खबर के सर में मंगलवार को पेयजल के पास की गंदगी साफ कर दी गई है.
इनका कहना है-
मेरे संज्ञान में बात आई है, मैं इसकी जांच करवाकर व्यवस्थायें ठीक करवाता हूं.
डॉ मनीष शर्मा, सीएमएचओ
