प्रियंका सिंह
महोबा: उत्तर प्रदेश के वीर प्रसूता बुंदेलखंड की धरती आज ‘जय माता दी’ के जयकारों से गुंजायमान है। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर जनपद के ऐतिहासिक ‘माँ बड़ी चंद्रिका देवी’ मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धा और विश्वास के इस प्रमुख केंद्र में न केवल महोबा, बल्कि दूर-दराज के जनपदों से भी श्रद्धालु माँ का आशीर्वाद लेने पहुँचे।
चंदेल कालीन गौरव और वीर आल्हा-ऊदल की गाथा
माँ बड़ी चंद्रिका देवी का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास का साक्षी भी है। चंदेल शासन काल के दौरान निर्मित यह मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
ऐतिहासिक महत्व: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बुंदेलखंड के अमर सेनानी आल्हा और ऊदल युद्ध पर जाने से पहले माँ बड़ी चंद्रिका के चरणों में शीश नवाते थे। माना जाता है कि माँ के आशीर्वाद से ही उन्हें अदम्य साहस और विजय प्राप्त होती थी। आज भी यहाँ की हवाओं में उस वीरता और भक्ति का संगम महसूस किया जा सकता है।
भक्तों की अटूट आस्था
मंदिर परिसर में नारियल, चुनरी और पुष्प अर्पित करने के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं। मंदिर की मान्यता है कि यहाँ जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी मुराद लेकर आता है, माँ उसकी झोली कभी खाली नहीं रखतीं। दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के चेहरों पर एक विशेष प्रकार की शांति और सकारात्मक ऊर्जा दिखाई दे रही है।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। जगह-जगह स्वयंसेवक तैनात हैं ताकि वृद्धों और बच्चों को दर्शन में असुविधा न हो। रात्रि में होने वाली माँ की भव्य आरती आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है, जिसमें हजारों की संख्या में दीप प्रज्वलित किए जा रहे हैं।
