छतरपुर: छतरपुर के जिला अस्पताल में रविवार को मानवता और प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बिजली विभाग द्वारा मेंटेनेंस कार्य के चलते अस्पताल की बिजली आपूर्ति घंटों बाधित रही, जिससे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई। सबसे हृदय विदारक स्थिति ब्लड बैंक में देखने को मिली, जहाँ बिजली न होने के कारण न तो रक्त का संग्रहण हो सका और न ही जरूरी क्रॉस-मैचिंग जांचें हो पाईं।
खून के लिए भटकते रहे परिजन
दूर-दराज के गांवों से आए गंभीर मरीजों के परिजन खून के लिए दर-दर भटकते नजर आए। कई परिजनों ने बताया कि उनके मरीज की हालत नाजुक थी, लेकिन ब्लड बैंक कर्मियों ने बिजली न होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। बिना बिजली के मशीनों ने काम करना बंद कर दिया, जिससे रक्त की उपलब्धता शून्य हो गई और मरीजों की जान पर बन आई।
करोड़ों का जनरेटर बना सफेद हाथी
हैरानी की बात यह रही कि अस्पताल परिसर में भारी-भरकम जनरेटर की सुविधा मौजूद है, जिसे आपातकालीन स्थिति के लिए ही रखा गया है। इसके बावजूद प्रबंधन ने उसे चालू करने की जहमत नहीं उठाई। मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि जनरेटर केवल ‘दिखावे’ के लिए है। जब सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब अस्पताल प्रशासन की इस चुप्पी ने उनकी संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है।
अस्पताल प्रशासन पर भड़का जनता का आक्रोश
अस्पताल में मौजूद लोगों ने प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इसे ‘प्रशासनिक हत्या’ की कोशिश करार दिया। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सेवा में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मांग की है कि बिजली कटौती के दौरान बैकअप सुनिश्चित न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
