भोपाल। नेशनल कमीशन फॉर इण्डियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन ने अप्रैल 2025 में समय अनुसार डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डीएम) कोर्स शुरू करने को कहा था। लेकिन प्रदेश के कालेजों में अब तक यह कोर्स शुरू नहीं हो सका है। बता दें तीन वर्षीय डीएम कोर्स मनोरोग, हेपेटोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, रिप्रोडक्टिव मेडिसिन, जेरोन्टोलॉजी जैसे विभाग में प्रारंभ होना था। लेकिन प्रदेश के 7 शासकीय व 32 निजी आयुर्वेद कॉलेज समेत कुल 39 कॉलेज में करीब एक साल बाद भी कोर्स संचालन नहीं हो सका है।
क्यों जरूरी है कोर्स-
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को मजबूत और वैज्ञानिक बनाने में डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डीएम), आयुर्वेद कोर्स एमडी के बाद किया जाने वाला उच्चतम स्तर का प्रशिक्षण है। जो जटिल और गंभीर बीमारियों के उपचार में विशेषज्ञता प्रदान करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती जीवनशैली और बढ़ते रोगों के स्वरूप को देखते हुए आयुर्वेद में भी गहन अध्ययन और उन्नत क्लीनिकल कौशल की जरूरत है। साथ ही नई पद्धतियों, रिसर्च से शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के साथ आयुर्वेद को आधुनिक उपचार से जोड़कर अधिक मजबूती से अस्पतालों में बेहतर उपचार सुविधा दी जा सकेगी।
जल्द हो डीएम कोर्स के लिए संसाधनों की व्यवस्था-
निजी आयुर्वेद महाविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ राकेश पाण्डेय के अनुसार प्रदेश में भी एलोपैथी की तरह ही सुपर स्पेशलिस्ट आयुर्वेद डॉक्टर्स की आवश्यकता बनी हुई है। खासकर राजधानी भोपाल में तो पं खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद कॉलेज से जुड़ा हुआ वेलनेस सेंटर जैसे जगहों पर इन डॉक्टर्स की अहमियत बढ़ जाती है। कहीं न कहीं एमबीबीएस डॉक्टर्स की कमी को इन सुपर स्पेशलिस्ट आयुर्वेद डॉक्टरों से सरकार विशेष ट्रेनिंग देकर पूरी कर सकती है। लेकिन इसके लिये जरूरी है शीघ्र ही यह डीएम कोर्स प्रारंभ करने के लिए संसाधनों, टीचिंग, नॉनटीचिंग व हॉस्पिटल स्टॉफ की मापदण्डानुसार व्यवस्था करना।
