जबलपुर: रीवा जिला की सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को हाईकोर्ट से झटका लगा है। उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए दायर की गयी चुनाव याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज करने से इंकार कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिका में उठाये गये मामले को ट्रायल के दौरान ही तथ्यो व साक्ष्यो पर परखा जा सकता है।रीवा जिला की सेमरिया विधानसभा सीट पर साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के पराजित उम्मीदवार के पी त्रिपाठी ने निर्वाचित कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी।
कांग्रेस विधायक ने चुनाव याचिका खारिज किये जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था।आवेदन की सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्वाचित विधायक के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज है। उन्होने अपने चुनाव के हलफनामा में कोई अपराध दर्ज होने की जानकारी नहीं दी है। इस संबंध में याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी प्रस्तुत की थी। अनावेदक विधायक की तरफ से तर्क प्रस्तुत किया गया कि निर्वाचन पत्र प्रस्तुत करते हुए उनके खिलाफ कोई अपराधिक प्रकरण लंबित नहीं था।
याचिकाकर्ता की तरफ से यह भी आरोप लगाये गये कि निर्वाचित विधायक ने अपने हलफनामा में आर्थिक जानकारी भी छुपाई है।
उनके नाम पर एचडीएफसी बैंक में 50 लाख 87 लाख रुपये का लोन बकाया है। अनावेदक विधायक की तरफ से तर्क दिया गया कि लोन मेसर्स अभय मिश्रा कॉन्ट्रैक्टर ने नाम पर लिया था। अनावदेक निर्वाचित विधायक उसके पार्टनर थे परंतु 2008 में रिटायर हो गये थे। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि बैंक स्टेटमेंट की कॉपी में अनावेदक अभय मिश्रा का नाम बॉरोअर के तौर पर दिखाया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अनावेदक विधायक ने अपने नॉमिनेशन फॉर्म में आय का स्त्रोत पेंशन व सैलरी बताया था। उन्होने पेंशन व सैलरी प्राप्त होने वाले प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की डिटेल्स नहीं दीं है। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उक्त कंपनियों के डायरेक्टर पद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और कंपनी एक्ट के प्रावधान के तहत मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स को इसकी जानकारी दे दी गई थी।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिका में नामांकन पत्र के साथ दायर हलफनामा में जरूरी जानकारी छिपाने के बारे में खास बातें कही हैं। चुनाव याचिका में लगाये गये आरोप सही पाये जाते है तो विजयी उम्मीदवार का चुनाव निरस्त किया जा सकता है। ट्रायल के दौरान साक्ष्य व तथ्यो का परीक्षण किये बिना उसे खारिज नहीं किया जा सकता है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उक्त चुनाव याचिका जनवरी 2024 में दायर की गयी है। अभी तक अनावेदक की तरफ से लिखित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। एकलपीठ ने अनावेदक विधायक को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश जारी किये।
