नई दिल्ली | ईरान संकट के बीच कतर के रास लफ्फान औद्योगिक शहर पर हुए भीषण मिसाइल हमलों ने दुनिया भर की ऊर्जा सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। कतर एनर्जी के आधिकारिक बयान के अनुसार, 18 और 19 मार्च को हुए इन हमलों ने देश की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात क्षमता को 17 प्रतिशत तक कम कर दिया है। कंपनी के सीईओ साद शेरिदा अल-काबी ने चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण उत्पादन सुविधाओं को हुए इस भारी नुकसान की भरपाई करने में कम से कम पांच साल का समय लग सकता है। इस व्यवधान के कारण कतर को सालाना लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है, जिससे वैश्विक बाजार में गैस की किल्लत बढ़नी तय है।
यह संकट भारत के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा (47 प्रतिशत) अकेले कतर से आयात करता है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारत ने 27.8 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी आयात की थी, जिसमें से 11.30 मिलियन मीट्रिक टन की आपूर्ति कतर ने की थी। कतर द्वारा ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) घोषित किए जाने की स्थिति में लंबे समय के अनुबंध प्रभावित होंगे। इससे भारतीय घरेलू बाजार में सीएनजी, पीएनजी और औद्योगिक गैस की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है, जो सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।
मिसाइल हमलों में केवल एलएनजी संयंत्र ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ‘गैस-टू-लिक्विड्स’ (Pearl GTL) फैसिलिटी को भी निशाना बनाया गया है। शेल द्वारा संचालित यह संयंत्र प्राकृतिक गैस को उच्च गुणवत्ता वाले क्लीनर फ्यूल और लुब्रिकेंट्स में बदलता है। अल-काबी ने स्पष्ट किया कि इस प्लांट की दो मुख्य उत्पादन लाइनों में से एक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई है, जिसके कम से कम एक साल तक बंद रहने की उम्मीद है। इस संकट का असर न केवल भारत, बल्कि चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ेगा। भारत सरकार अब वैकल्पिक देशों से गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने और रणनीतिक भंडार के उपयोग पर विचार कर रही है।

