
जबलपुर। मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना उपासना के साथ गुरुवार से वासंतेय नवरात्रि महापर्व शुरू हुआ। जबलपुर के तेवर स्थित राज्यराजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं का सुबह से ही तांता लगा हुआ था। मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दर्शन करने उमड़ पड़ी थी मंदिर परिसर में ढोल नगाड़ों और देवी भजनों की गूँज से वातावरण भक्तिमय हो गया था। बता दे कि मां त्रिपुर सुंदरी का यह मंदिर लगभग सातवीं शताब्दी में कल्चुरी कालीन राजा कर्णदेव द्वारा बनवाया गया था यहां मां त्रिपुर सुंदरी के तीन स्वरूप महाकाली महालक्ष्मी और मां सरस्वती की विशाल मूर्तियां स्थापित है। मान्यता अनुसार मां के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है। सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वैसे तो जगत जननी की साधना तो हर वर्ष होती है, लेकिन इस बार इन नौ दिनों में मैया की साधना को ज्योतिषविद अत्यावश्यक बता रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ऐसे प्रतिकूल समय में यदि मां भगवती की साधना की जायेगी तो विपरीत परिस्थितियों में डट कर खड़े रहने की शक्ति मां भगवती देंगी।
शैलपुत्री की उपासना से प्रारंभ हुई नवरात्रि
उल्लेखनीय है कि इस नवरात्रि में माता का आगमन पालिकी पर सवार होकर हो रहा है। ज्ञानी मान रहे हैं कि इस बार की साधना से साधक मानसिक रूप से भवपार होगा। जब भी नवरात्रि में माता का आगमन पालकी पर होता है तो समाज में अस्थिरता, तनाव, अचानक बड़ी दुर्घटनाए आदि की स्थिति से निजात मिलती है। आम जनमानस के सुखों में कमी की होती है। इसलिए इस नवरात्रि में माता का पूजन अर्चन क्षमा प्रार्थना के साथ किया जाना नितांत आवश्यक है।
मंदिरों में उमड़ी भीड़
शहर के देवी मंदिरों में मैया के भक्तों की भीड़ दिनभर उमड़ती रही। बड़ी खेरमाई-छोटी खेरमाई, बड़ी देवन, छोटी देवन, बूढ़ी खेरमाई, दीक्षितपुरा देवन, भरतीपुर मंदिर, काली माई सदर, गढ़ा फाटक मंदिर सहित सभी सिद्ध देवी स्थलों पर आज सुबह से दर्शनों का तांता लगा रहा। मंदिरों में घट स्थापना का क्रम सुबह से ही शुय हो गया था। आने वाले नो दिन मैया के विविध श्रृंगार होंगे। व्यक्तिगत साधना करने वालों के लिए भी नवरात्रि वरदान बन के आई है।
हुआ था सृष्टि का निर्माण
मान्यता है कि हिन्दू नव वर्ष के आरंभ में ही ब्रम्हा ने सृष्टि रची थी और इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी होता है। महाराष्ट्र में इस दिन पूरन पोली या मीठी रोटी बनाई जाती है। इसमें गुड़, नमक, नीम के फूल, इमली और कच्चा आम मिलाया जाता है बता दे कि गुड़ मिठास के लिए नीम के फूल कड़वाहट मिटाने के लिए और इमली व आम जीवन के खट्टे मीठे स्वाद चखने का प्रतीक होती है।
प्रज्वलित की गई हज़ारो ज्योत
नवरात्र की विशेष साधना के लिए विख्यात सिविक सेंटर स्थित बगलामुखी मठ भी ईश्वरीय आलोक के चैतन्य प्रकाश से रोशन हो गया। ब्रम्हचारी चैतन्यानंद महाराज ने बताया कि मंदिर के घट स्थापना परिसर में हजारों की संख्या में अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई है।सिर्फ शहर बल्कि दूर-दराज के श्रद्धालुओं सहित विदेशों के शक्ति-उपासकों द्वारा यहां घट प्रज्जवलित कराए गए हैं। ब्रम्हचारी जी ने बताया कि इन कलशों का दर्शन मात्र मां आदिशक्ति से निर्झरित शक्ति को अंगीकार कराती है। मंदिर में आज सुबह से ही मां के दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा। लोग कठिन से कठिन अनुष्ठान यहां संपन्न करा रहे हैं। ये क्रम पूरी नवरात्र चलेगा।
