
भोपाल। मप्र कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने गुरुवार को स्कूल शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा वर्ष 2023 से 2025 के बीच जारी टेंडरों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और संगठित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए नायक ने कहा कि मामला केवल पुराने टेंडरों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान में जारी प्रक्रियाओं में भी ऐसी गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति की आशंका है।
उन्होंने नर्मदा वैली डेवलपमेंट अथॉरिटी का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि फर्जी बैंक गारंटी और अनियमितताओं से जुड़े पहले के मामलों में अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
वर्ष 2023 के टेंडर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 3,500 कंप्यूटर, यूपीएस और प्रिंटर की खरीदी की लागत 40 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 90 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीकी शर्तों के जरिए प्रतिस्पर्धा सीमित कर उपकरण बाजार मूल्य से 200–250 प्रतिशत अधिक दर पर खरीदे गए, जो केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
वर्ष 2025 में इंटरएक्टिव बोर्ड टेंडरों में भी इसी तरह की गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि एसर को प्रारंभ में बाहर किए जाने के बावजूद उसी कंपनी के उपकरणों की आपूर्ति की गई।
वर्ष 2026 के नए टेंडरों को लेकर चिंता जताते हुए नायक ने उच्चस्तरीय एसआईटी जांच, भुगतानों के फॉरेंसिक ऑडिट और सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में इन कथित अनियमितताओं को “गंभीर और चिंताजनक” बताया।
इस अवसर पर स्वदेश शर्मा, कुंदन पंजाबी, विवेक त्रिपाठी, जितेंद्र मिश्रा, राहुल राज, अमित तावड़े और प्रतिभा विक्टर उपस्थित रहे।
