प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में एक गंभीर समस्या पर चर्चा की है. उन्होंने देशवासियों से स्वास्थ्य और फिटनेस पर विशेष ध्यान देने की अपील की.उन्होंने कहा कि भारत में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है और इस पर ध्यान देना जरूरी हो गया है. पीएम मोदी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि हर आठ में से एक व्यक्ति मोटापे से जूझ रहा है. प्रधानमंत्री ने लोगों को सलाह दी कि वे अपने खाने में तेल की खपत को कम करें.उन्होंने सुझाव दिया कि अगर हर नागरिक अपनी खाने की तेल की खपत को 10 $फीसदी कम कर देता है, तो इससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि तेल का अधिक सेवन हृदय रोग, मधुमेह और अन्य बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है. जाहिर है मोटापा एक राष्ट्रीय महामारी के रूप में बदलता जा रहा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 23 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन वाली और चालीस प्रतिशत मोटे पेट वाली थीं. जबकि 22 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन वाले और 12 प्रतिशत मोटे पेट वाले थे. दरअसल, आजकल लोग कैलोरी सघन व पोषक तत्वों की कमी वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के विकल्प को चुनते हैं. ऐसे में इन खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले अधिक वजन वाले तो हो जाते हैं मगर रहते कुपोषित ही हैं. तेजी से बढ़ते शहरीकरण और निष्क्रिय जीवनशैली ने भी मोटापे की समस्या को बढ़ाया है. यह संकट उन कम आय वाले समूहों में भी है, जहां स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा की कमी इससे जुड़े जोखिमों को बढ़ा देती है.निर्विवाद रूप से पोषण संबंधी खामियों और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के कारण ही मोटापे की समस्या बढ़ रही है. खासकर शहरी क्षेत्रों में जंक फूड का बढ़ता प्रचलन इस समस्या को बढ़ा रहा है.वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी सामर्थ्य के अभाव में असंतुलित आहार जैसी चुनौतियों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया में बाजार के भ्रामक प्रचार के चलते युवा स्वास्थ्य की बजाय सौंदर्यशास्त्र को प्राथमिकता देते हैं. जिसके लिये वे असुरक्षित आहार या कृत्रिम सप्लीमेंट का सहारा ले रहे हैं.राष्ट्रीय मधुमेह, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन के शोध के निष्कर्ष मोटापे के लिये दो चरणीय वर्गीकरण प्रणाली पेश करते हैं.पहला उपचार पूर्व प्रयास और दूसरा उपचार.इस साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण का उद्देश्य बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को संबोधित करना, संतुलित जीवन शैली को अपनाना और मोटापे की महामारी पर अंकुश लगाना है. निश्चय ही तेजी से बढ़ते गैर संक्रामक रोगों पर अंकुश लगाने के लिये मोटापा दूर करने के गंभीर प्रयासों की जरूरत है. बदलते सामाजिक व आर्थिक परिदृश्य में लोगों का स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने के लिये नीति-नियंताओं, स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले पेशेवरों और जागरूक नागरिकों के सहयोगात्मक प्रयासों की जरूरत है.सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हम संतुलित भोजन के साथ अपनी शारीरिक सक्रियता को बढाएं. सप्ताह में हमारे व्यायाम, खेल, तैराकी, जिम व योग-प्राणायाम के न्यूनतम घंटे निर्धारित होने चाहिए. निर्विवाद रूप से हमारे खानपान का संयम, गतिशील जीवन और प्रकृति के अनुरूप खानपान चर्बी घटाने में सहायक हो सकता है.यदि हम ऐसा करते हैं तो हमारे शरीर में अनावश्यक चर्बी जमा नहीं होगी और हम मधुमेह, उच्च रक्तचाप व हृदय रोग जैसी चुनौतियों का सामना करने से बच सकते हैं. दरअसल, मोटापे का उपचार केवल अनुशासित जीवन शैली और नियमित व्यायाम में ही निहित हैं.यही बात प्रधानमंत्री ने मन की बात में समझाने की कोशिश की है.