नयी दिल्ली, 19 मार्च (वार्ता) सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण माल भाडे़ और बीमा प्रीमियम में उछाल से प्रभावित निर्यातकों की मदद के लिए ‘रिलीफ’ (रेजिस्टेंस एंड लाजिस्टिक्स इंरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फेसिलिटेशन) नाम से एक योजना शुरू की है । इसमें निर्यात ऋण बीमा योजना के तहत मदद की जाएगी और इस हस्तक्षेप के लिए करीब 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। निर्यात संवर्धन मिशन के तहत लागू की जा रही इस योजना में सरकार की ओर से एक समयबद्ध और लक्षित हस्तक्षेप किया जाएगा।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है ” यह पहल उन भारतीय निर्यातकों को समर्थन देने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जो असाधारण रूप से बढ़े हुए मालभाड़े (फ्रेट), बढ़े हुए बीमा प्रीमियम और खाड़ी क्षेत्र तथा व्यापक पश्चिम एशिया के समुद्री मार्ग में व्यवधान के कारण उत्पन्न युद्ध-संबंधी निर्यात जोखिमों से प्रभावित हुए हैं।” हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ी हुई सुरक्षा चिंताओं के कारण जहाज़ों के मार्ग बदलने पड़े हैं, यात्रा मार्ग लंबा हो गया है, ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई है और आपातकालीन संघर्ष-संबंधित अतिरिक्त शुल्क (सर्चार्ज) लगाए गए हैं।
सरकार ने सभी संबंधित विभागों को वर्तमान परिस्थिति में समग्र समन्वय के साथ काम करने के लिए दो मार्च को एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया है ताकि स्थिति की निगरानी की जा सके और सुविधा के उपायों का समन्वय किया जा सके। विज्ञप्ति के अनुसार रिलीफ के तीन पूरक घटक शामिल हैं जो संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, इज़राइल, क़तर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान और यमन जैसे देशों के लिए या उनके माध्यम से ट्रांसशिपमेंट हेतु भेजे जाने वाले निर्यात माल पर लागू होंगे। पहले घटक के अंतर्गत जिन निर्यातकों ने पहले से ही पात्र खेप के लिए निर्यात क्रेडिट गारंटी निगम ( ईसीजीसी ) योजना के तहत कर्ज का बीमा कवर करा रखा है उन्हें पात्र अवधि (14 फरवरी -15 मार्च 2026) के दौरान मौजूदा ईसीजीसी कवर के अतिरिक्त अधिकतम 100 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज का लाभ मिलेगा। इससे बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। दूसरे घटक के तहत निर्यात माल भेजने की योजना बना रहे निर्यातकों (16 मार्च से 15 जून 2026 तक) ईसीजीसी ऋण बीमा कराने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस घटक में सरकार की मदद से मौजूदा ईसीजीसी कवर के अतिरिक्त अधिकतम 95 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज उपलब्ध कराया जाएगा। उम्मीद है कि इससे लॉजिस्टिक्स की अनिश्चितताओं के बावजूद निर्यातकों का विश्वास बना रहेगा और निर्यात कारोबार जारी रहेंगे।
तीसरा घटक ऐसे छोटे मझोली निर्यातकों के लिए है जिन्होंने पात्र अवधि (14 फरवरी से 15 मार्च 2026) के दौरान कर्ज का बीमा नहीं कराया है लेकिन वे मालभाड़े और बीमा प्रीमियम की असाधारण वृद्धि का सामना कर रहे हैं। ऐसे बिना बीमा कवर वाले निर्यातकों को आंशिक प्रतिपूर्ति (अधिकतम 50 प्रतिशत तक) की व्यवस्था शामिल की गयी है। यह सहायता निर्धारित शर्तों, दस्तावेज़ सत्यापन और अधिसूचित सीमा (प्रति निर्यातक अधिकतम 50 लाख तक रुपये ) के अंतर्गत की जाएगी और इसका उद्देश्य संघर्ष से संबंधित लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि से राहत देना है। रिलीफ योजना का कार्यान्वयन निर्यात संवर्धन मिशन के अंतर्गत 497 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

