सतना : एलपीजी संकट शुरु होते ही एक ओर जहां प्रति सिलेंडर 60 रु की बढ़ोत्तरी हो गई वहीं दूसरी ओर बुकिंग का समय भी 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया. लेकिन इसके बावजूद भी उपभोक्ताओं की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के ऐप के जरिए प्रीपेड बुकिंग कराने के सप्ताह भर बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. जबकि गैस एजेंसी के वाहन लगातार फर्राटे मारते हुए दुकान-ठेलों-खुमचों तक हर रोज सिलेंडर पहुंचाने में कोई कमी नहीं कर रहे हैं.
सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों तेल कंपनियों से संबद्ध गैस एजेंसियों से लेकर उनके गोदामों के बाहर हर रोज सैकड़ों उपभोक्ताओं की भीड़ पहुंच रही है. दिन भर इंतजार करने के बावजूद उनमें से कई लोगों को मायूसी का सामना करना पड़ रहा है. हलांकि पिछले 2 दिनों में गैस एजेंसियों द्वारा कुछ गैस सिलेंडर बांटे भी गए. लेकिन बुधवार को अचानक उसमें भी कमी होती नजर आने लगी. गैस एजेंसियों के बाहर खाली सिालेंडर लेकर पहुंचने वाले अधिकांश लोगों का कहना है कि उनके द्वारा सप्ताह भर पहले से ही बुकिंग की जा चुकी है.
लेकिन गैस एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा हर रोज कोई न कोई नया बहाना बनाकर उन्हें बैरंग लौटा दिया जा रहा है. शहर के प्रभात विहार निवासी सत्यम तिवारी का कहना है कि पेट्रोलियम कंपनी के ऐप पर उन्होंने 937.50 रु जमा करते हुए प्रीपेड बुकिंग की थी. जिसकी पुष्टि भी एसएमएस के जरिए हुई थी. लेकिन सप्ताह भर बीत जाने के बावजूद भी उनके पास न तो कंपनी की ओर से कोई डीएसी नंबर आया और न ही यह बताया जा रहा है कि उनके गैस सिलेंडर की आपूर्ति कब होगी. इस संबंध में जब उन्होंने गैस एजेंसी से संपर्क किया तो उन्हें यह कहते हुए टरका दिया गया कि पूरा सिस्टम ऊपर से लॉक रहता है.
लगभग यही समस्या शहर के मुख्त्यारगंज निवासी निशांत श्रीवास्तव ने भी बताई कि प्रीपेड बुकिंग कराने के बावजूद भी उन्हें तो कोई मैसेज ही आ रहा है और न ही सिलेंडर मिलने की संभावना दिखाई दे रही है. निशांत ने आगे बताया कि सरकार द्वारा प्रत्येक उपभोक्ता के लिए प्रति वर्ष 12 गैस सिलेंडर की सीमा निर्धारित की गई है. मार्च महीने में वित्तीय वर्ष समाप्त होने जा रहा है. लिहाजा अधिकांश उपभोक्ताओं के हिस्से के बचे हुए सिलेंडर या तो ऐसे ही लैप्स हो जाएंगे अथवा एजेंसियां उनका उपयोग अपनी कमाई के लिए कर लेंगी. लेकिन इसके बावजूद भी न तो आपूर्ति विभाग को यह नजर आ रहा है और न ही पेट्रोलियम कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधकों को इससे कोई लेना-देना है.
आखिर कहां से हो रही आपूर्ति
शहर के अधिकांश हिस्सों में संचालित चाय-नाश्ते की दुकानों में एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग होता है. पिछले कई दिनों से कामर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति बंद है. लेकिन इसके बावजूद भी इन स्थानों पर कहीं कामर्शियल तो कहीं घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग धड़ल्ले से जारी है. औसतन एक घर में यदि एक सिलेंडर महीने भर चलता है तो इन दुकानों पर वह महज 2-3 दिन में ही समाप्त हो जाता है. लिहाजा सवाल उठना लाजमी है कि इन दुकानों में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति आखिरकार कहां से हो रही है. आखिर क्या वजह है कि सप्ताह भर पहले से प्रीपेड बुकिंग कराने के बाद भी घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं. लेकिन गैस एजेंसियों के वाहन फरार्टा मारते हुए दुकानदारों तक हर रोज गैस सिलेंडर पहुंचा रहे हैं. इसका मतलब तो यही निकलता है कि गैस एजेंसियों तक आपूिर्त पहुंच रही है. लेकिन वहां से आगे की वितरण व्यवस्था में कई सुराख हैं, जो जिम्मेदारों को या तो नजर नहीं आ रहे अथवा वे देखकर भी नहीं देखने का स्वांग रच रहे हैं
