लंदन | पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करीब 2 अरब डॉलर के घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए लंदन के हाई कोर्ट में एक नई याचिका दायर की है। मंगलवार को रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस में हुई सुनवाई के दौरान नीरव के वकीलों ने दावा किया कि यदि उसे भारत भेजा गया, तो वहां की जेलों और पूछताछ के दौरान उसे ‘अमानवीय यातना’ दी जा सकती है। 54 वर्षीय नीरव मोदी उत्तरी लंदन की पेंटनविले जेल से वीडियो लिंक के जरिए पेश हुआ। उसके बैरिस्टर ने दलील दी कि भारत सरकार द्वारा दिए गए सुरक्षा आश्वासन ‘विश्वसनीय’ नहीं हैं और उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल के बजाय पूछताछ के लिए गुजरात भी ले जाया जा सकता है।
लॉर्ड जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे की पीठ ने दिन भर चली लंबी बहस के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। भारत सरकार की ओर से पैरवी कर रहे क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने नीरव की दलीलों का कड़ा विरोध किया। सीपीएस ने कोर्ट में कहा कि नीरव की अर्जी न केवल देरी से दाखिल की गई है, बल्कि यह पूरी तरह ‘झूठे आधारों’ पर टिकी है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और वहां की न्यायपालिका स्वतंत्र है, ऐसे में यातना के आरोप बेबुनियाद हैं। कोर्ट ने कहा है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जल्द ही अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।
यदि लंदन हाई कोर्ट इस अपील को खारिज कर देता है, तो नीरव मोदी को भारत लाने की कानूनी बाधाएं लगभग समाप्त हो जाएंगी और उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल भेजने का रास्ता साफ हो जाएगा। अप्रैल 2021 में ही ब्रिटेन की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने उसके प्रत्यर्पण का आदेश दिया था, जिसे नीरव पिछले कई सालों से कानूनी दांव-पेंचों के जरिए टालने की कोशिश कर रहा है। भारत में उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और गवाहों के साथ छेड़छाड़ जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसियां (CBI और ED) बेसब्री से इस फैसले का इंतजार कर रही हैं ताकि घोटाले की करोड़ों की रकम की वसूली और कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके।

