तेहरान/बगदाद | अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन’ के 19वें दिन ईरान को अपने सबसे प्रभावशाली रणनीतिकार की मौत का सामना करना पड़ा है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी और बासिज कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी की इजराइली हवाई हमले में मौत की पुष्टि हो गई है। लारीजानी को मौजूदा संकट के दौर में ईरान का ‘डी-फैक्टो’ (वास्तविक) नेता माना जा रहा था। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले को कायराना बताते हुए कहा है कि वे अपने नेताओं के खून का बदला जरूर लेंगे। वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ईरान के शासन को भीतर से कमजोर करने की दिशा में एक निर्णायक सफलता करार दिया है।
नेतृत्व पर हुए इस प्रहार के कुछ ही घंटों बाद इराक की राजधानी बगदाद में भारी तनाव फैल गया। जवाबी कार्रवाई के रूप में संदिग्ध ड्रोन और रॉकेटों ने बगदाद के सबसे सुरक्षित ‘ग्रीन ज़ोन’ स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया। चश्मदीदों के अनुसार, दूतावास परिसर के भीतर कई धमाकों की आवाज सुनी गई और हवा में धुआं उठता देखा गया। अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली (C-RAM) ने कई प्रोजेक्टाइल्स को हवा में ही मार गिराया, लेकिन कम से कम एक ड्रोन दूतावास परिसर के भीतर गिरा। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, क्योंकि ईरान समर्थित गुटों ने ‘अंतिम संघर्ष’ की चेतावनी दी है।
ईरान और इजराइल के बीच जारी यह सीधा युद्ध अब अपने सबसे घातक चरण में पहुँच चुका है। 28 फरवरी को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद लारीजानी का मारा जाना ईरान के रक्षा और कूटनीतिक ढांचे के लिए अपूरणीय क्षति है। युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने की कगार पर है और खाड़ी देशों के ऊपर भी हमलों का खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि इजराइल अब ईरानी क्षेत्र के काफी अंदर तक ऑपरेशन कर रहा है ताकि वहाँ की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाया जा सके। फिलहाल, पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की लपटें तेज हो रही हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय किसी बड़े मानवीय संकट की आशंका से भयभीत है।

