गुवाहाटी | असम में होने वाले विधानसभा चुनावों से ऐन पहले कांग्रेस पार्टी को एक और जबरदस्त झटका लगा है। नगांव से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे अपने त्याग-पत्र में बोरदोलोई ने गहरे दुख के साथ पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है। छात्र राजनीति (NSUI) के दिनों से कांग्रेस से जुड़े रहे बोरदोलोई ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर उन्हें लगातार अपमानित किया जा रहा था और महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रदेश नेतृत्व का कोई समर्थन नहीं मिल रहा था। पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के भाजपा में शामिल होने के बाद इसे कांग्रेस के लिए असम में अब तक की सबसे बड़ी क्षति माना जा रहा है।
मीडिया से चर्चा करते हुए भावुक बोरदोलोई ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को त्याग दिया है, जिससे वे खुश नहीं हैं, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते तिरस्कार के कारण उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि असम कांग्रेस में उनके प्रति सहानुभूति की कमी थी और वे खुद को बेहद अकेला महसूस कर रहे थे। गौरतलब है कि बोरदोलोई आगामी चुनावों के लिए घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष भी थे और उनकी गिनती राज्य के सबसे शिक्षित और प्रभावशाली नेताओं में होती है। हालांकि, पार्टी के केंद्रीय नेताओं जैसे जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई ने इसे ‘पारिवारिक मतभेद’ बताकर उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन बोरदोलोई अपने फैसले पर अडिग रहे।
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इस इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस जहां इसे भाजपा की साजिश और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा बदनाम करने की कोशिश बता रही है, वहीं पार्टी के भीतर मचे इस घमासान से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता दिख रहा है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले तीन लोकसभा सांसदों वाली कांग्रेस के लिए अपने गढ़ को बचाना अब चुनौतीपूर्ण हो गया है। फिलहाल, इस बात की अटकलें तेज हैं कि बोरदोलोई का अगला कदम क्या होगा, हालांकि कांग्रेस आलाकमान अभी भी उन्हें परिवार का सदस्य बताकर डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है।

