जबलपुर: पाटन विकासखंड के बेनीखेड़ा गांव में समन्वित खेती का जीवंत उदाहरण देखने को मिला। यहां विकास ग्रोवर ने अपनी कृषि भूमि को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर हर संसाधन का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया है। जिसमें खेत के निचले हिस्से में उन्होंने तीन तालाब बनवाए हैं, जहां कतला, रोहू, ग्रास कॉपर और मृगल जैसी उन्नत मछली की नस्लों का पालन किया जा रहा है। तालाबों का पानी पोषक तत्वों से भरपूर है और इसे खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फसलों की उपज में भी वृद्धि होती है।
आम, अमरूद, सेव और नींबू के बाग में लगी हरियाली
ग्रोवर ने खेत के एक हिस्से में आम, अमरूद, सेव, केला, एवोकैडो, अनार और नींबू के बाग लगाए हैं। यह न केवल खेती की आय बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी उन्हें अच्छी मांग का लाभ मिलता है। विविध फसल और बागवानी से जोखिम कम होता है और किसान को स्थिर आमदनी होती है।
दुधारू पशु और खेत के अपशिष्ट का कारगर उपयोग
जानकारी के अनुसार ग्रोवर के पास दुधारू पशु भी हैं। इनसे प्राप्त दूध सीधे बाजार में बेचा जाता है। वहीं, पशुओं का गोबर और मूत्र ‘वर्मी कंपोस्ट’ (केंचुआ खाद) बनाने में इस्तेमाल होता है। यह कंपोस्ट खेतों की मिट्टी को उर्वरक बनाता है, जबकि खेत का चारा पशुओं के लिए उपयोगी रहता है। इस तरह उनकी खेती और पशुपालन एक-दूसरे का पोषण करते हैं।
कृषि अधिकारियों ने निरीक्षण कर किया प्रोत्साहित
सोमवार को उप संचालक कृषि डॉ एस के निगम और अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने खेत का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पंकज श्रीवास्तव और कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती सीमा राउत भी मौजूद रहे। डॉ निगम ने अन्य किसानों को समन्वित खेती अपनाने और अधिक आय के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
