
रतलाम। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार ‘अनुसंधान पद्धति, उच्च शिक्षा में नवाचार: चुनौतियां एवं भविष्य की संभावनाएं’ का समापन प्रेरणादायी विचारों के साथ हुआ। सेमिनार में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए विद्वानों ने अनुसंधान की गुणवत्ता, समाजोपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए।
प्रारंभ में मुख्य अतिथि मप्र लोकसेवा आयोग, इंदौर के अध्यक्ष प्रो. राजेश लाल मेहरा, अनुसंधान अधिकारी डॉ. माधुरी यादव, प्रो. राजेंद्र जड़ेजा बड़ौदा ,अतिरिक्त संचालक डॉ. एचएल अनिजवाल द्वारा मां सरस्वती को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित किया गया ।
मुख्य अतिथि श्री मेहरा ने कहा कि अनुसंधान वह सत्य है जो आत्मा की ओर बढने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आत्मा का अनुसंधान ही सबसे बड़ा अनुसंधान है, जो व्यक्ति को स्वयं को जानने में सहायता करता है। उन्होंने कहा कि जीवन में कर्म और पुरुषार्थ का विशेष महत्व है तथा अनुसंधान केवल अध्ययन का विषय नहीं बल्कि जीवन जीने का माध्यम भी है। अनुसंधान अधिकारी डॉ. माधुरी यादव ने जनजातीय जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जनजातीय समुदाय प्रकृति को माता के समान मानता है।
सेमिनार के दूसरे दिन आयोजित तृतीय सत्र की अध्यक्षता उत्कृष्ट शिक्षा संस्थान, भोपाल से आए प्रो. मनीष शर्मा ने की। इस अवसर पर गुरु गोविंद जनजातीय विश्वविद्यालय (जीजीटीयू), बांसवाड़ा से आए डॉ. सफकत राणा, अतिरिक्त संचालक डॉ. एचएल अनिजवाल ने अपनी बात रखी। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वाय के मिश्रा ने कहा कि अनुसंधान के लिए आत्म चिंतन और आत्म मंथन आवश्यक है। उन्होंने सेमिनार के सफल आयोजन के लिए प्रो. विनोद शर्मा, प्रो. सीएल शर्मा तथा महाविद्यालय के समस्त स्टाफ की सराहना की। समापन सत्र का संचालन डॉ. अंजेला सिंगारे, आभार डॉ. भावना देशपांडे ने माना।
इस अवसर पर डॉ. धीरेंद्र केरवाल, डॉ. व्ही शास्त्री, डॉ. रविकांत मालवीय, डॉ. कुलदीप सिंह राठौड़, हितेश सांखला, नीरज आर्य, डॉ. खुशबू मांडवारा, उर्वशी वर्मा, डॉ. विश्वजीत सिंह यादव, डॉ. श्वेता तिवारी, सुनील खरोल, डॉ. ललिता लोधा आदि ने अपने शोधपत्रों का वाचन कर विषय के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। सत्र का संचालन प्रो. पूनम चौधरी तथा आभार डॉ. ललिता मरमट द्वारा किया गया।
रसायन शास्त्र की पीरियॉडिक टेबल के 72 तत्व मोबाइल निर्माण में उपयोग किए
बड़ौदा से आए प्रो. राजेंद्र जड़ेजा ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी वैज्ञानिक ज्ञान निहित है। उन्होंने यह भी बताया कि रसायन शास्त्र की पीरियॉडिक टेबल के लगभग 72 तत्व मोबाइल निर्माण में उपयोग किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उच्च स्तर के शोध से ही विकास की संभावनाएं बढ़ती हैं।
