लखनऊ 15 मार्च (वार्ता) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज का भारत केवल परिवर्तन की बात करने वाला देश नहीं है, बल्कि परिवर्तन को जीकर दिखाने वाला राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि देश दृढ़ संकल्प के साथ विकास के अगले स्तर की ओर बढ़ रहा है। कभी भारत को संभावनाओं का देश कहा जाता था, लेकिन आज यह उपलब्धियों का देश बन चुका है।
सीएसआईआर-नेशनल बाटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ में रविवार को आयोजित बोगनविलिया ‘उत्सव-2026‘ के समापन अवसर पर राज्यपाल ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। अपने सम्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि देश में नेक्स्ट् जेनेरेशन का आधुनिक भौतिक अवसंरचना (फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित हो रहा है तथा डिजिटल क्रांति ने गांव-गांव तक सुविधा और पारदर्शिता का प्रकाश पहुंचाया है।
उन्होंने राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि लखनऊ में इतना महत्वपूर्ण और बड़ा वैज्ञानिक संस्थान कार्य कर रहा है, जहां वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में अनेक शोध किए जा रहे हैं तथा पौधों की नई-नई किस्में विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यहां विश्व के विभिन्न देशों से भी पौधों की प्रजातियां लाकर उनका संरक्षण एवं अध्ययन किया जा रहा है। इस प्रकार के संस्थानों की जानकारी होनी चाहिए।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि फूल केवल उद्यानों की शोभा ही नहीं बढ़ाते, बल्कि हमारे जीवन में सौंदर्य, संतुलन और सकारात्मकता का संदेश भी देते हैं। उन्होंने कहा कि बोगेनवेलिया का पौधा हमें यह प्रेरणा देता है कि परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी कठिन क्यों न हों, जीवन को सदैव खिलते रहना चाहिए।
राज्यपाल ने सीएसआईआर फ्लोरीकल्चर मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में लगभग 2,241 किसानों के लाभान्वित होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल हजारों परिवारों के जीवन में उगते हुए नए सपनों का प्रतीक है। उन्होंने भारत की धरती को पादप विविधता की अनुपम धरोहर बताते हुए कहा कि जब हमारे वैज्ञानिक नई प्रजातियों का विकास करते हैं और उनके संरक्षण का दायित्व निभाते हैं, तब वे समृद्ध जैव विविधता के सच्चे प्रहरी बन जाते हैं।
इस अवसर पर एनबीआरआई के निदेशक डॉ एके शसानी ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए बताया कि संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष तीन बार विभिन्न विषयों पर पुष्प एवं वनस्पति महोत्सव आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये आयोजन मुख्य रूप से लखनऊ के नागरिकों को प्रकृति, पौधों की विविधता और उद्यानिकी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से किए जाते हैं।
