नयी दिल्ली, 15 मार्च (वार्ता) अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं संरक्षा प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा खाने-पीने की चीजों को व्यवसायियों को स्थायी लाइसेंस देने के निर्णय को परिवर्तनकारी बताया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री लोकसभा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने रविवार को कहा कि इससे व्यवसायियों को बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराना होगा और अनुपालना का बोझ कम होगा। उन्होंने कहा कि ये बड़े सुधार सरकार के उस विजन के अनुरूप हैं जिसके तहत नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाकर व्यापारियों, छोटे उद्यमियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाया जा रहा है। यह कारोबार की आसानी को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। श्री खंडेलवाल ने कहा कि समय-समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण करना लंबे समय से एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया रही है, जिससे व्यापारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और कई बार इसमें देरी तथा भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी पैदा हो जाती थीं। स्थायी लाइसेंस की नयी व्यवस्था ऐसे सभी अवरोधों को समाप्त करेगी और खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए अनुपालन को काफी सरल बनायेगी।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने कहा कि इन सुधारों से देशभर में लगभग 2.5 करोड़ खाद्य व्यवसाय संचालकों को, जिनमें छोटे व्यापारी, खाद्य निर्माता, रेस्टोरेंट संचालक और स्ट्रीट फूड विक्रेता शामिल हैं, बड़ा लाभ मिलेगा। कैट के अध्यक्ष ब्रजमोहन अग्रवाल ने बताया कि एफएसएसएआई के बेसिक पंजीकरण के लिए टर्नओवर सीमा 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ कर दी गयी है, जो 01 अप्रैल से प्रभावी होगी। इससे सूक्ष्म और छोटे खाद्य व्यवसायों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त 50 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए राज्य लाइसेंस आवश्यक होगा, जबकि 50 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए केंद्रीय लाइसेंस लागू होगा। इससे लाइसेंसिंग व्यवस्था और अधिक सरल हो जायेगी।

