
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 को भव्य और दिव्य स्वरूप देने की तैयारियों के बीच इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा की एक महत्वपूर्ण बैठक शहर के शिवांजलि गार्डन में आयोजित की गई। इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में किन्नर संत, महंत और श्रद्धालु शामिल हुए। बैठक के दौरान सिंहस्थ 2028 में किन्नर अखाड़ा की भागीदारी, व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
इस अवसर पर सानिध्य प्रदान करने पहुंचे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज ने अपने संबोधन में कहाकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाने का जो संकल्प लिया गया है, वह सनातन धर्म और सिंहस्थ की परंपरा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल है।
सिंहस्थ 2028 में भी अखाड़ा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भागीदारी निभाएगा। बैठक के उपरांत आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी द्वारा विभिन्न राज्यों से आए किन्नर संतों का विधिवत पट्टाभिषेक कर उन्हें महामंडलेश्वर एवं श्रीमहंत की उपाधि प्रदान की गई। धार्मिक अनुष्ठान अत्यंत श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। चांदी के शंख से दुग्धाभिषेक किया गया, संतों को केसरिया शॉल ओढ़ाई गई और पुष्पवर्षा के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह सम्मान समारोह संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर सूरत से आए दिलीपनंद गिरि, तेलंगाना से महाकालीनंद गिरि, राजस्थान से कामाख्या नंद गिरि तथा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से रेखानंद गिरि को इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा का महामंडलेश्वर घोषित किया गया। वहीं गुजरात की नंदिनीनंद गिरि तथा महाराष्ट्र के अकोला से आए गणेशानंद गिरि को श्रीमहंत की उपाधि प्रदान की गई।
अजय दास किन्नर नहीं है, हम बहिष्कृत कर चुके
उज्जैन में किन्नर अखाड़े के पंजीयन को लेकर कथित दस्तावेज दिखाने वाले ऋषि अजय दास को लेकर आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि वह फर्जी व्यक्ति है और किन्नर ना होकर पुरुष है। हम उसे बहिष्कृत कर चुके हैं बावजूद वह हमारी लोकप्रियता से डरकर किन्नर अखाड़े को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास करता है। उज्जैन जिला प्रशासन को ऐसे तत्वों पर वैधानिक कार्रवाई एवं उन्हें उज्जैन में आने पर रोक लगाना चाहिये।
