यूएनएचआरसी में भारत ने दोहराया ‘आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरा’

जेनेवा, 12 मार्च (वार्ता) भारत ने बुधवार को जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में इस बात को दोहराया कि आतंकवाद ‘मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक’ बना हुआ है और इसके खिलाफ एक ‘एकीकृत वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता’ है।

भारत की ओर से राजदूत सिबी जॉर्ज ने परिषद के 61वें सामान्य सत्र में आह्वान किया कि परिषद सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए दृढ़ रहे।

राजदूत ने कहा, “जैसा कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कुछ दिन पहले इस सम्मानित परिषद को संबोधित करते हुए रेखांकित किया था कि हमारे विचार-विमर्श केवल बयानों और प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि सबसे कमजोर लोगों के दैनिक जीवन में मूर्त सुधार लाने वाले होने चाहिए।”

श्री जॉर्ज ने जोर देकर कहा, “आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। हमें इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने में अडिग रहना चाहिए। इस मुद्दे पर परिषद को एक स्वर में बोलना जारी रखना चाहिए।”

राजदूत ने भारत में डिजिटल उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग का उल्लेख करते हुए बताया है कि कैसे इन तकनीकों ने 1.4 अरब भारतीयों को सशक्त बनाया है, जिससे न्याय तक पहुंच, नागरिक और राजनीतिक अधिकार, लोकतांत्रिक भागीदारी और महिला सशक्तिकरण का विस्तार हुआ है।

श्री जॉर्ज ने नयी दिल्ली में हाल ही में संपन्न ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ का भी हवाला दिया और इस बात पर जोर दिया कि एआई की शक्ति का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब इसके फायदे समान रूप से साझा किए जाएं, जिसमें ‘ग्लोबल साउथ’ भी शामिल हों।

 

 

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