देश में LPG किल्लत की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने दी बड़ी राहत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित पांच देशों से शुरू होगी गैस सप्लाई, घरेलू उत्पादन में भी 10% की बढ़ोतरी

नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित होने से बचाने के लिए अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से अतिरिक्त एलपीजी और एलएनजी की खेप सुरक्षित कर ली है। अधिकारियों के मुताबिक, अब गैस की आपूर्ति केवल पारंपरिक खाड़ी देशों के रास्तों पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि वैकल्पिक समुद्री मार्गों से ये खेप सीधे भारतीय तटों पर पहुंचेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश में रसोई गैस का स्टॉक पर्याप्त बना रहेगा।

घरेलू स्तर पर गैस की कमी को दूर करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में कुकिंग गैस के उत्पादन को अधिकतम स्तर पर पहुँचा दिया है, जहाँ टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। इसके साथ ही, देश के अन्य रिफाइनरों ने भी घरेलू एलपीजी उत्पादन में 10 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। केजी-डी6 बेसिन से निकलने वाली प्राकृतिक गैस को भी अब विशेष प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपयोग के लिए डायवर्ट किया जा रहा है, ताकि आम नागरिकों को सिलेंडर के लिए इंतजार न करना पड़े।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जनता को आश्वस्त किया है कि देश में गैस का भंडार स्थिर है और घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए एक स्पष्ट प्राथमिकता सूची तैयार की है, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं और अस्पतालों को 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। बाजार में कृत्रिम किल्लत और जमाखोरी रोकने के लिए ‘इंटर-बुकिंग’ अवधि को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और वैश्विक स्रोतों के विविधीकरण से भविष्य में कीमतों के झटकों से भी सुरक्षा मिलेगी।

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