भोपाल। आचार्य मुक्ति सागर ने कहा कि जीवन में सच्ची सफलता का आधार शिष्टाचार, विनम्रता और सरलता है। इन गुणों को अपनाकर व्यक्ति जीवन की जटिलताओं से बाहर निकल सकता है। इन दिनों आचार्य का संघ शहर के जैन श्वेतांबर मंदिरों की वंदना के लिए पदविहार कर रहा है। बुधवार को पिपलानी जैन मंदिर पहुंचकर उन्होंने मूलनायक चंद्रप्रभु भगवान की वंदना की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंगलाचरण में नवकार महामंत्र का सामूहिक वाचन किया।
इस अवसर पर आचार्य मुक्ति सागर ने कहा कि आज का व्यक्ति तनाव और समस्याओं में इतना उलझ गया है कि वह स्वयं को पहचानना ही भूल गया है। संयमित जीवन, विनम्रता और शिष्टाचार से ही जीवन में संतुलन संभव है। कार्यक्रम में जैन समाज और मंदिर समिति के सदस्यों ने आचार्य संघ की अगवानी की। 11 मार्च को तुलसी नगर जिनालय में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।
