लोक कलाओं का संरक्षण ही समाज में बढ़ाता है आपसी सद्भाव: कमलेश्वर

सीधी। पूर्व मंत्री स्वर्गीय इंद्रजीत कुमार की पावन स्मृति और उनकी जन्म जयंती के अवसर पर ग्राम चितवरिया में दो दिवसीय कनपुरा लोक महोत्सव एवं विशाल कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कनपुरा लोक संस्कृति को समर्पित इस उत्सव में पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल, पूर्व विधायक विद्यावती पटेल, सरस्वती सिंह, पूर्व अध्यक्ष रामअशोक शर्मा, ज्ञानेन्द्र द्विवेदी, अरविंद सिंह चंदेल सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की।

मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा पिताजी स्व.इंद्रजीत कुमार का मानना था कि लोकगीत नाट्य, संगीत और कला के संरक्षण से ही समाज में आपसी भाईचारा और सद्भाव बढ़ता है। यह आयोजन विलुप्त होती बघेली पहचान को बचाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने आगे भावुक होते हुए कहा स्वर्गीय कुमार साहब अक्सर कहते थे कि मुझे याद मत रखो, मेरी सेवा को याद रखोगे तो सेवक अपने आप याद रहेगा। आज की चुनौतियों के बीच हमें अपनी जमीन और अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। पूर्व अध्यक्ष रामअशोक शर्मा ने कहा कि इंद्रजीत कुमार के जन्म जयंती पर यह आयोजन उनके जीवन आदर्शो को याद दिलाता है उनकी सोच रही कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति को नाम लेकर बुलाना। आज वर्तमान समय में उनके तरह के व्यक्ति हो पाना कठिन है। पूर्व विधायक श्रीमती विद्यावती पटेल ने स्व.इंद्रजीत कुमार की ईमानदारी और नेकी को याद करते हुए लोक संस्कृति के निरंतर संवर्धन पर जोर दिया। वहीं पूर्व विधायक सरस्वती सिंह ने श्री अवध सद्भावना समिति की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 16 वर्षों से यह समिति अनवरत रूप से बघेली लोक रंग को नई ऊंचाई दे रही है।

दो दिवसीय इस महोत्सव में ग्रामीण प्रतिभाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विविध प्रस्तुतियां दी गई। कुल 28 टीमों ने अहिराई, सैला, कोलदहका और गुदुम बाजा जैसे पारम्परिक नृत्यों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां दीं। होली के अवसर पर विभिन्न पंचायतों से आए कलाकारों ने फाग गायन से पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

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