नयी दिल्ली, 10 मार्च (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को झारखंड के बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेसरा को झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश का पालन करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है, जिसमें संस्थान को एक मृतक छात्र के माता-पिता को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। यह मामला संस्थान के परिसर से जुड़ी एक हिंसक घटना में छात्र की मौत से संबंधित है।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ, संस्थान द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर ‘विशेष अनुमति याचिका’ पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान, बीआईटी मेसरा की ओर से पेश वकील ने कहा कि अगर कुछ समय दिया जाए, तो संस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए भुगतान के लिए दो सप्ताह की मोहलत दी और मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च के लिए सूचीबद्ध की है।
यह घटना 14 नवंबर, 2024 की है, जब बीआईटी मेसरा पॉलिटेक्निक कॉलेज के तीसरे सेमेस्टर के छात्र राजा पासवान की एक हमले के बाद मृत्यु हो गई थी। झारखंड उच्च न्यायालय ने संबंधित आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करते हुए कॉलेज प्रशासन की ओर से सुरक्षा में गंभीर कमियां पाई थीं। इसी आधार पर न्यायालय ने संस्थान को मृतक छात्र के माता-पिता को मुआवजा देने का आदेश दिया था।
इसके अतिरिक्त, उच्च न्यायालय ने राज्य के अधिकारियों को राज्य भर के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ तैयार करने के निर्देश भी दिए थे।