तेहरान, 10 मार्च (वार्ता) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत का अनुभव “कड़वा” रहा है और अब उसके साथ नए सिरे से कूटनीतिक वार्ता की संभावना नहीं है। श्री अराघची ने पीबीएस को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका पर बार-बार विश्वासघात और सैन्य आक्रामकता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि अमेरिकियों से बातचीत या उनके साथ बातचीत करने का सवाल अब एजेंडे में होगा। हमारे लिए यह अनुभव बहुत कड़वा रहा है।”
उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले वर्ष जून में अमेरिका के साथ अच्छे इरादे से बातचीत शुरू की थी, लेकिन बातचीत के दौरान ही उस पर हमला कर दिया गया। श्री अराघची के अनुसार इस वर्ष भी अमेरिका ने यह भरोसा दिलाया था कि वह हमला नहीं करेगा और ईरान के परमाणु मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। विदेश मंत्री ने कहा कि तीन दौर की बातचीत में प्रगति के बावजूद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वार्ता दल ने भी प्रगति को स्वीकार किया था, लेकिन इसके बावजूद हमला किया गया।
श्री अराघची ने फारस की खाड़ी के देशों को संदेश देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमले आत्मरक्षा के अधिकार के तहत किये गये हैं। उन्होंने कहा कि यदि अन्य देश अपनी सुविधाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं तो ईरान को भी अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि यह युद्ध ईरान ने नहीं चुना बल्कि उस पर थोपा गया है और देश केवल अपनी रक्षा कर रहा है। श्री अराघची ने यह भी कहा कि ईरान जरूरत पड़ने तक मिसाइल हमले जारी रखने के लिए तैयार है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों के साथ संबंधों को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेजी और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की आशंका बढ़ गई है। श्री अराघची ने हालांकि इस बात से इनकार किया कि ईरान जानबूझकर तेल आपूर्ति रोक रहा है। उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया गया है और वहां नौवहन को रोका नहीं गया है, लेकिन इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों के कारण क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ी है, जिससे जहाजरानी कंपनियां और तेल टैंकर उस मार्ग से गुजरने में हिचक रहे हैं।

