संयुक्त राष्ट्र संघ | संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग के दौरान अफगानिस्तान पर हुए हवाई हमलों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ ‘इस्लामिक एकजुटता’ का ढोंग करना और दूसरी तरफ रमजान के पवित्र महीने में बेगुनाह लोगों पर बमबारी करना पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। आंकड़ों के अनुसार, 6 मार्च 2026 तक इन हमलों में 185 आम नागरिक मारे गए हैं, जिनमें से 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं। भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और किसी देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार दिया है।
भारत ने राजनयिक तरीके से पाकिस्तान की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें हमलों को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बताया गया था। पी. हरीश ने स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद खुद लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ जैसे आतंकी समूहों को प्रॉक्सी के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने हाल ही में पहलगाम में हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक सीमा पार आतंकवाद को मदद मिलती रहेगी, तब तक वैश्विक शांति संभव नहीं है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इन आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए एकजुट हों।
अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रतिनिधि जॉर्जेट गैग्नन ने बताया कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष और सीमा बंद होने से मानवीय संकट गहरा गया है। व्यापारिक रास्ते बंद होने और ईरान के मार्ग में युद्ध के कारण बाधा आने से अफगानिस्तान में जरूरी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे पहले से ही जर्जर हो चुकी अफगान अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बढ़ रहा है। भारत ने चिंता व्यक्त की है कि पड़ोसी देशों के साथ जारी यह अस्थिरता पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है।

