ब्यावरा/राजगढ़: जिला मुख्यालय पर आरटीओ कार्यालय के भवन निर्माण में हुई लापरवाही, अनियमितता से शासन के तीन करोड़ रूपये बर्बाद हुए है. आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि 10 वर्ष बीतने के बाद भी तमाम जिम्मेंदार आंखें मूंद कर बैठे हुए है. प्रशासनिक लापरवाही की सामूहिक अनदेखी यह साबित करती है कि जनता के पैसों को लूटने में जवाबदारों के संगठन की मजबूती के आगे सारे नियम, कानून धरे के धरे रह जाते है.
इस मामले को हाल ही में विधानसभा के माध्यम से विधायक अमरसिंह यादव ने उठाया था. उन्होंने इसको लेकर विस्तार से परिवहन विभाग के मंत्री से सवाल जवाब किये थे. जिसके जवाब में विधायक को गोलमोल जवाब दिया गया है. जानकारी के अनुसार विधायक यादव ने यह भी पूछा था कि इस मामले में किसको दोषी माना गया है और किसके विरूद्ध कार्रवाई की गई है. इसके जवाब में विधायक को बताया गया है कि किसके विरूद्ध कार्रवाई की गई है यह पता नहीं है. इसकी जानकारी जुटाई जा रही है.
इधर, परिवहन विभाग की मांग पर प्रशासन द्वारा वर्ष 2016 में विभाग को भूमि आवंटित कर दी गई थी. इसी के साथ ही विभाग के भवन निर्माण हेतु 3 करोड़ रूपये का आवंटन भी आ गया था. जमीन आवंटन में राजस्व अमले को भी कोई व्यक्तिगत रूचि नहीं होने का परिणाम यह रहा कि आरटीओ का भवन निर्माण उस जगह कर दिया गया जो भूमि राजगढ़ के रेलवे स्टेशन के लिये आवंटित की गई थी.
करीब पांच हजार करोड़ रूपये से अधिक का राजस्व वसूलने वाले परिवहन विभाग की हालत राजगढ़ जिले में काफी दयनीय है. जिलेवासियों से परिवहन विभाग टैक्स तो दादागिरी से वसूल लेता है लेकिन उसे सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता है. यहां तक कि विभाग के कार्यालय भवन में कुछ वक्त रूकने के लिये छायादार जगह नहीं है. परिवहन विभाग अपने लिये भूमि आवंटन कराने के बावजूद खुद का भवन नहीं बना पाया है। इसका दुष्परिणाम जिले के तमाम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है जिनका वास्ता परिवहन विभाग से पड़ता है. अब 10 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है.
जानकारी के अनुसार कलेक्टर राजगढ़ ने वर्ष 2016 में 797/1/6 रकबा 5.486 हैक्टेयर में से 1.620 हैक्टेयर भूमि जिला परिवहन कार्यालय हेतु आवंटित कर दी थी. आवंटित भूमि पर आरटीओ भवन बनने की बजाय निर्माण एजेंसी ने सर्वे नंबर 812 की भूमि पर भवन बना दिया तत्कालीन राजस्व विभाग की पूरी टीम ने ठेकेदार को सही भूमि नहीं बताई नतीजतन ठेकेदार और निर्माण एजेंसी ने भूमि का विधिवत सीमांकन, कब्जा प्राप्त किये उस सर्वे नंबर 812 भूमि पर भवन बना दिया जो रेलवे स्टेशन के लिये आरक्षित थी. यद्यपि रेलवे स्टेशन इस भवन से चंद कदम दूर बन गया है। लेकिन यह भूमि कागजों में रेलवे के पास ही है और उनके उपयोग की है.
