तेहरान | 09 मार्च, 2026: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग को एक हफ्ते से अधिक समय बीत चुका है, जिससे समूचे मध्य-पूर्व में हाहाकार मचा है। शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर खाड़ी देशों पर हुए हालिया हमलों के लिए माफी मांगी और इसे ‘गलत’ करार दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका और इजरायल के सामने कभी सरेंडर नहीं करेगा। राष्ट्रपति ने पड़ोसी मुल्कों को आगाह किया कि यदि उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए किया गया, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगा। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान की शीर्ष लीडरशिप को खत्म कर दिया है।
मध्य-पूर्व के बिगड़ते हालातों ने भारत की नींद उड़ा दी है। विशेषकर संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों में जारी तनाव के बीच वहां रह रहे करीब 90 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है। यह युद्ध केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका गहरा प्रहार हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है, जो भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। भारत सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की अपील कर रही है ताकि प्रवासियों और आर्थिक हितों की रक्षा हो सके।
यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के उस संयुक्त हमले के बाद शुरू हुआ, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई बड़े ईरानी अधिकारियों की मौत हो गई थी। इस घटना ने क्षेत्र में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। जहां ट्रंप इस कार्रवाई को ‘धरती से कैंसर खत्म करने’ जैसा बता रहे हैं, वहीं ईरान में नए नेतृत्व मुजतबा खामेनेई के तहत बदले की आग और तेज हो गई है। लड़कियों के स्कूल पर हुई बमबारी जैसे आरोपों ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। फिलहाल पूरा इलाका बारूद के ढेर पर बैठा है और वैश्विक शक्तियां किसी बड़े मानवीय संकट के डर से सहमी हुई हैं।

