पाकिस्तान में खूनी संघर्ष: खामेनेई की मौत पर प्रदर्शन कर रहे शिया समुदाय पर सेना की गोलीबारी

पाकिस्तान में खामेनेई की मौत के विरोध में प्रदर्शन कर रहे शिया समुदाय पर सेना की गोलीबारी में 38 लोग मारे गए। प्रदर्शनकारियों ने सैन्य दफ्तरों और इमारतों में आग लगा दी है।

पाकिस्तान के गिलगिट-बाल्टिस्तान में भड़की हिंसा ने अब पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है जहां सेना की गोलीबारी में दर्जनों बेगुनाह मारे गए हैं। ईरानी नेता खामेनेई की मौत के विरोध में सड़कों पर उतरे शिया समुदाय के लोगों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। स्कार्दू से लेकर इस्लामाबाद तक फैले इस विरोध प्रदर्शन ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य शासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई इलाकों में कर्फ्यू लागू करना पड़ा है और अमेरिकी दूतावास ने भी अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी किया है।

स्कार्दू में भारी हिंसा और सेना की गोलीबारी
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्कार्दू शहर में पहली मार्च से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक खूनी मंजर में बदल चुका है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बाल्टी-शिया समुदाय के लोगों पर पाकिस्तानी सेना और अर्द्धसैन्य बलों ने अचानक अंधाधुंध गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। इस दुखद घटना में अब तक 38 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी इमारतों में आगजनी
सेना की इस बर्बर कार्रवाई से गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने स्कार्दू ब्रिगेड के कमांडर के आवास और नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री के दफ्तरों को निशाना बनाकर उनमें आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा यहीं नहीं थमा और उन्होंने आर्मी पब्लिक स्कूल, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क जैसी महत्वपूर्ण इमारतों को भी फूंक दिया। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह के कार्यालय और संचार संस्थानों को भी इस भारी हिंसा के दौरान आग के हवाले कर दिया गया।

खामेनेई की मौत और पाकिस्तान में गहराता आक्रोश
राजधानी इस्लामाबाद सहित पाकिस्तान के कई शहरों में शिया समुदाय के लोग अमेरिकी-इजरायली हमलों में मारे गए ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के समर्थन में रैलियां निकाल रहे हैं। प्रदर्शनकारी सड़कों पर खामेनेई के पोस्टर लेकर ‘अमेरिका की मौत’ और ‘इजरायल की मौत’ के नारे लगा रहे हैं जिससे सुरक्षा एजेंसियां काफी सतर्क हैं। पाकिस्तान की कुल आबादी में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह समुदाय अपने नेता की मौत को लेकर बेहद आहत है और लगातार न्याय की मांग कर रहा है।

अमेरिकी दूतावास का अलर्ट और बढ़ता तनाव
देश में बढ़ती हिंसा और बिगड़ते हालात को देखते हुए पाकिस्तान स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को प्रभावित इलाकों में न जाने की सख्त सलाह दी है। दूतावास ने विशेष रूप से बलोचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की यात्रा के प्रति लोगों को सावधान करते हुए सुरक्षा परामर्श जारी किया है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई संवेदनशील क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया है लेकिन लोगों का गुस्सा अभी भी शांत होता नजर नहीं आ रहा है।

दफ्तरों और आवासीय परिसरों में तबाही
गुस्साए लोगों ने न केवल सरकारी दफ्तरों को नुकसान पहुंचाया बल्कि सेना से जुड़े आवासीय परिसरों में भी घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया। स्कार्दू और आसपास के इलाकों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कार्यालय और ग्रीन टूरिज्म के दफ्तर अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इस गृहयुद्ध जैसी स्थिति ने पाकिस्तान सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय अब पीछे हटने को तैयार नहीं है।

 

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