जैसलमेर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार को राजस्थान की स्वर्णनगरी जैसलमेर पहुंचे। उन्होंने अपने प्रवास की शुरुआत किशनघाट स्थित सीमा जन कल्याण समिति से की, जहाँ कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके पश्चात डॉ. भागवत विश्व प्रसिद्ध सोनार दुर्ग पहुंचे और प्राचीन पार्श्वनाथ जैन मंदिर के मूल गर्भगृह में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने यहाँ स्थित ‘जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार’ का अवलोकन कर सदियों पुरानी पांडुलिपियों की जानकारी ली। सरसंघचालक ने दादा गुरुदेव की उस पावन चादर के भी दर्शन किए, जिसका 871 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अभिषेक होने जा रहा है।
किले में दर्शन पूजन के बाद डॉ. भागवत देदांसर मेला ग्राउंड स्थित मुख्य कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। यहाँ वे जैन समाज के प्रथम दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरि महाराज की स्मृति में एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट का लोकार्पण करेंगे। इसी गरिमामयी कार्यक्रम में वे डॉ. विद्युत प्रभा द्वारा रचित पुस्तक ‘दादा गुरुदेव’ का विमोचन भी करेंगे। जैसलमेर जैन समाज के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण है, क्योंकि यहाँ 872 वर्ष पुरानी पवित्र चादर सहित अनेक धार्मिक धरोहरें सुरक्षित हैं, जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु भारी संख्या में रेगिस्तानी शहर में उमड़े हैं।
दोपहर के सत्र में डॉ. मोहन भागवत एक विशाल धर्मसभा को संबोधित करेंगे। अपने उद्बोधन में वे भारतीय संस्कृति की महानता, आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक सद्भाव के महत्व पर प्रकाश डालेंगे। इस ऐतिहासिक चादर महोत्सव को लेकर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए हैं। जैन समाज के साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति में होने वाले इस आयोजन को आध्यात्मिक शक्ति और त्याग की परंपरा का प्रतीक माना जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर पूरे जैसलमेर में उत्सव का माहौल है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है।

