भुवनेश्वर/कोलकाता | प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सहारा प्राइम सिटी जमीन मामले और ‘हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी’ से जुड़ी धोखाधड़ी को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने ओडिशा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कंपनी के कई ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल सबूत, वित्तीय दस्तावेज और आपत्तिजनक कागजात जब्त किए हैं। ईडी के अनुसार, ओडिशा के बरहमपुर में सहारा की लगभग 32 एकड़ जमीन को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए धोखे से बेचा गया था। जांच में सामने आया कि सहारा ग्रुप के सीनियर मैनेजमेंट के इशारे पर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर यह बिक्री की गई थी।
ईडी की विस्तृत जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा ग्रुप एक सुनियोजित पोंजी स्कीम चला रहा था। जमाकर्ताओं के फंड को बिना किसी कानूनी निगरानी के मैनेज किया गया और मैच्योरिटी की रकम वापस करने के बजाय उसे जबरन दूसरी स्कीमों में दोबारा निवेश करा दिया गया। इस हेरफेर को छिपाने के लिए कंपनी की बैलेंस शीट और खातों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। सहारा ग्रुप के खिलाफ देश भर में 500 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि जमाकर्ताओं के पैसे का इस्तेमाल बेनामी संपत्तियां बनाने, व्यक्तिगत लोन देने और निजी उपयोग के लिए किया गया, जिससे लाखों निवेशक अपने हक से वंचित रह गए।
इस मामले में ईडी ने अब तक तीन प्रमुख आरोपियों—अनिल वैलापरम्पिल, अब्राहम और ओपी श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी ने इस घोटाले से जुड़ी कई जमीनों और बेनामी संपत्तियों को जब्त करने के लिए पांच प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर भी जारी किए हैं। मामले में मुख्य चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। ईडी अब सहारा ग्रुप की अन्य कोऑपरेटिव सोसाइटियों के वित्तीय लेन-देन की भी गहराई से जांच कर रही है ताकि निवेशकों के डूबे हुए पैसे के स्रोत का पता लगाया जा सके और दोषियों पर नकेल कसी जा सके।

