गोल्ड कोस्ट | ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित महिला एएफसी एशियन कप के दौरान ईरानी महिला नेशनल फुटबॉल टीम ने एक साहसी कदम उठाकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच शुरू होने से पहले जब स्टेडियम में ईरान का राष्ट्रगान बजाया गया, तो टीम की किसी भी खिलाड़ी या हेड कोच मरजियाह जाफरी ने उसे नहीं गाया। सभी खिलाड़ी कतार में खड़े होकर सीधे देखते रहे और अपनी आवाज नहीं निकाली। यह ‘साइलेंट प्रोटेस्ट’ ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हालिया हत्या और देश में जारी तनावपूर्ण हालातों के विरोध में एक प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है।
मैदानी मुकाबले की बात करें तो दक्षिण कोरियाई टीम ने ईरान पर अपना दबदबा बनाए रखा और यह मैच 3-0 से जीत लिया। हालांकि ईरान को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन कोच मरजियाह जाफरी ने अपनी टीम के जज्बे और कोशिशों की सराहना की। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब कैप्टन जहरा घनबारी और कोच से खामेनेई की मौत और राजनीतिक स्थिति पर सवाल पूछे गए, तो उन्होंने चतुराई से इसे टाल दिया। कोच ने खेल पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया एशिया की मजबूत टीमों में से एक है और उनकी टीम ने दूसरे हाफ में आक्रामक रणनीति अपनाकर कड़ी टक्कर देने की कोशिश की।
2026 के इस टूर्नामेंट में ईरान का अब तक का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। टीम ने अब तक खेले गए तीन मैचों में से दो गंवाए हैं और एक मैच ड्रॉ रहा है। दक्षिण कोरिया के खिलाफ पेनल्टी और सेट-पीस की गलतियों के कारण उन्हें करारी हार झेलनी पड़ी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका यह राजनीतिक विरोध चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। दक्षिण कोरिया के खिलाफ मिली इस शिकस्त के बाद अब टीम को टूर्नामेंट में बने रहने के लिए अपने आगामी मुकाबलों में दमदार वापसी करनी होगी।

