तेहरान/दुबई | ईरान पर अमेरिका और इजराइल के भीषण हमलों के बीच तेहरान के गलियारों में नए नेतृत्व को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का अगला सुप्रीम लीडर बनाए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इस बीच, युद्ध के पांचवें दिन भी संघर्ष थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह लड़ाई लंबी खिंच सकती है। इजराइल ने भी अपने हमलों का दायरा बढ़ाते हुए लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया है, जहाँ बीते 24 घंटों में कम से कम 52 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
युद्ध की आग अब उन क्षेत्रों तक पहुँच गई है जिन्हें अब तक सुरक्षित पनाहगाह माना जाता था। दुबई में अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमलों की खबर ने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। ईरान समर्थित गुटों ने न केवल दूतावासों बल्कि कतर में ऊर्जा केंद्रों और सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, देश में मरने वालों की संख्या 800 के करीब पहुँच गई है। ट्रम्प प्रशासन ने इन हमलों का जवाब ‘अत्यंत कठोरता’ से देने का ऐलान किया है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर तबाही का खतरा मंडरा रहा है।
इस भीषण संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और नागरिक सुरक्षा पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों में विमानों का परिचालन ठप है और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को एक दर्जन से ज्यादा मध्य पूर्वी देशों को तुरंत छोड़ने की सलाह दी है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम लीडर की मौत और किसी स्पष्ट शांति योजना के अभाव ने इस क्षेत्र को एक ऐसे लंबे और खूनी संघर्ष की ओर धकेल दिया है, जिसके नतीजे पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं।

