तीन महीने से खाद्यान्न नहीं मिलने से मजबूर ग्रामीणों ने किया जल सत्याग्रह

सतना : एक ओर जहां होली के त्योहार की खुशियां मनाई जा रही हैं वहीं दूसरी ओर अंतिम पंक्ति में खड़े ग्रामीण दो जून की रोटी को तरस रहे हैं. पिछले 3 महीने से शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न नहीं मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों को जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो उन्होंने अपने गांव के निकट स्थित तालाब में खड़े होकर जल सत्याग्रह करने का मार्ग अपना लिया. इस घटना के सोशल मीडिया पर वाइरल होते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया. अधिकारियों ने न सिर्फ पानी में उतर कर ग्रामीणों को समझाइस दी बल्कि अनियमतता की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई.

जिले के उचेहरा क्षेत्र में मढ़ऊ, धनेह और पिथौराबाद गांव के निवासी मंगलवार को एकत्रित होकर निकट स्थित एक तालाब के किनारे पहुंच गए. जहां पर उन्होंने घुटनों तक पानी में उतरकर जल सत्याग्रह शुरु कर दिया. ग्रामीणों को पानी में खड़ा होकर सत्याग्रह करता देख जब आस पास के लोगों ने जानकारी जुटाई तो मालुम हुआ कि उन्हें पिछले 3 महीने से शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न नहीं मिल रहा है. जिसके चलते उनके जीवन के लिए संकट खड़ा हो गया है. लिहाजा कुछ लोगों ने घटना से संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया पर वाइरल कर दिया. जैसे ही इस बात की जानकारी प्रशासन तक पहुंची वैसे ही हडक़ंप मच गया.

कुछ देर बाद ही उचेहरा थाना प्रभारी सतीश मिश्रा पुलिस बल के साक मौके पर पहुंच गए और समझाने का प्रयास किया. लेकिन बात नहीं बनी तो कुछ देर बाद सीईओ जिला पंचायत शैलेंद्र सिंह, एसडीएम उचेहरा सुरेश द्विवेदी और महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी रविकांत शर्मा सहित कई अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए. अधिकारियों ने पानी में उतरकर ग्रामीणों से चर्चा की. ग्रामीणों को इस बात का आश्वासन दिया गया कि उन्हें खाद्यान्न अवश्य मिलेगा. इसके साथ ही खाद्यान्न वितरण में अनियमितता करने वालों के विरुद्ध जांच कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों से आश्वासन मिलने पर ग्रामीण मान गए और अपाना जल सत्याग्रह समाप्त कर दिया.
  रिकार्ड-वास्तविक स्टॉक में अंतर
मामले की गंभीरता को देखते हुए होली का अवकाश होने के बावजूद भी एसडीएम सुरेश द्विवेदी द्वारा जांच शुरु कर दी गई. धनेह गांव में ग्रामीणों से चर्चा और जांच के दौरान प्राथमिक स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि उचेहरा तहसील की 26 दुकानों में दिसंबर 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक खाद्यान्न नहीं मिला है. जिससे परेशान होकर ग्रामीणों द्वारा सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की गई थी. जिसे देखते हुए एसडीएम द्वारा ग्रामीणों के कथन कराते हुए आगे की कार्रवाई शुरु कर दी गई. इसी कड़ी में खाद्यान्न दुकान संचालकों द्वारा गरीबों के अधिकार के खाद्यान्न को खुर्द बुर्द कर दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए.
3 करोड़ से अधिक का हेरफेर
ग्रामीणों को खाद्यान्न नहीं मिलने के मामले पर जब जांच शुरु हुई तो दिसंबर 25 से फरवरी 26 के बीच लगभग 3 करोड़ से अधिक की हेराफेरी सामने आ गई. कुछ 26 दुकानों में स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर पाया गया. कुल 4897 क्विंटल गेहूं, 4132 क्विंटल चावल, 44 क्विंटल नमक  और 28 क्विंटल चीनी राशन दुकानों से गायब मिली. जिसे देखते हुए एसडीएम द्वारा सभी संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा गया है. इसी कड़ी में उनकी दुकानों को हटाकर निकटवर्ती दुकानों में संलग्र कर दिया गया है. इसके अलावा मामले में प्रकरण दर्ज करने को लेकर उचेहरा थाने में शिकायत भी कर दी गई है.
कहां कितना खाद्यान्न गायब
एसडीएम द्वारा जांच में पाया गया कि शासकीय उचित मूल्य की दुकान परसमनिया में 20.95 लाख, पटीहट में 20.75 लाख, रामपुर पाठा में 15.23 लाख, गढ़ौत में 19.84 लाख, पिथौराबाद में 13.58 लाख, पोड़ी में 27.51 लाख, तिघरा में 7.16 लाख, बाबूपुर में 7.97 लाख, बरागढ़ोली में 1.70 लाख, पिपरीकला में 7.32 लाख, अटरा में 13.58 लाख, नंदहा में 8.83 लाख, तुषगवां में 21.38 लाख, धनेह में 12.88 लाख, मानिकपुर में 9.56 लाख, इटमा खोहरा में 7.09 लाख, पथहटा में 9.09 लाख, नरहटी में 1.58 लाख, नरहटीकला में 6.98 लाख, बांधी मौहार में 10.96 लाख इचौल में 5.39 लाख, आलमपुर में 21.12 लाख, और पिपरिया में 19.99 लाख रुपए का खाद्यान्न गायब मिला

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