टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में बारिश आई तो क्या होगा? जानिए ICC के नियम और रिजर्व डे का पूरा गणित।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल और फाइनल के लिए ICC ने खास नियम तय किए हैं। अगर मैच के दौरान बारिश होती है तो रिजर्व डे और DLS नियम के जरिए नतीजा निकालने की कोशिश की जाएगी।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक चरण में पहुंच चुका है, जहां चार मजबूत टीमें सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं। भारत, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले नॉकआउट मुकाबलों से पहले फैंस के मन में सबसे बड़ा सवाल मौसम को लेकर है। अगर सेमीफाइनल मैच के दौरान बारिश होती है या मुकाबला रद्द हो जाता है तो नतीजा कैसे निकलेगा, आइए विस्तार से समझते हैं।

सेमीफाइनल मुकाबलों का पूरा शेड्यूल

टी20 वर्ल्ड कप 2026 का पहला सेमीफाइनल 4 मार्च को खेला जाएगा, जबकि दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च को आयोजित होगा। चारों टीमों ने सुपर-8 चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए नॉकआउट में अपनी जगह पक्की की है। पहला मुकाबला साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में होगा। वहीं दूसरा सेमीफाइनल भारत और इंग्लैंड के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। इन मैचों के विजेता सीधे फाइनल में पहुंचेंगे।

नतीजे के लिए 10-10 ओवर का खेल जरूरी

आईसीसी के नियमों के अनुसार किसी भी सेमीफाइनल मैच का आधिकारिक परिणाम निकालने के लिए न्यूनतम 10-10 ओवर का खेल होना अनिवार्य है। सभी टीमें और फैंस पूरा 20 ओवर का मुकाबला देखना चाहते हैं, लेकिन यदि बारिश या खराब मौसम खेल में बाधा डालता है तो ओवर घटाए जा सकते हैं। हालांकि, अगर 10 ओवर भी पूरे नहीं हो पाते तो उसी दिन मैच का नतीजा घोषित नहीं किया जा सकता।

रिजर्व डे का क्या है नियम

आईसीसी ने दोनों सेमीफाइनल मुकाबलों के लिए रिजर्व डे भी तय किया है। यदि निर्धारित दिन पर मैच पूरा नहीं हो पाता या 10 ओवर का खेल संभव नहीं होता, तो मुकाबला अगले दिन यानी रिजर्व डे पर कराया जाएगा। रिजर्व डे पर मैच वहीं से शुरू होगा जहां से खेल रुका था या परिस्थितियों के अनुसार दोबारा आयोजित किया जाएगा।

मैच रद्द होने पर किसे मिलेगा फायदा

अगर खराब मौसम के कारण रिजर्व डे पर भी न्यूनतम ओवर पूरे नहीं हो पाते और मैच रद्द करना पड़ता है, तो सुपर-8 चरण में अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान पर रहने वाली टीम को फाइनल का टिकट मिलेगा। इस स्थिति में साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड को फायदा होगा, क्योंकि दोनों अपनी-अपनी ग्रुप टेबल में टॉपर रही थीं। वहीं भारत और न्यूजीलैंड को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

नॉकआउट मुकाबलों का दबाव पहले ही काफी ज्यादा होता है और ऐसे में मौसम की भूमिका भी अहम हो जाती है। सभी टीमें चाहेंगी कि मुकाबले बिना किसी रुकावट के पूरे हों ताकि फाइनल में पहुंचने का फैसला मैदान पर प्रदर्शन के आधार पर ही हो।

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