
सीहोर/ रेहटी। नगर में देर रात एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो जाने से हड़कंप मच गया. इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए. मामला रेहटी स्थित एक निजी हॉस्पिटल का बताया जा रहा है. हंगामे की सूचना मिलने पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया था.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक मनीराम, ग्राम बोरघाटी के निवासी थे. बताया जा रहा है कि अचानक तबीयत बिगडऩे पर परिजन उन्हें पहले शासकीय अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां चिकित्सकों ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए बेहतर उपचार के लिए रेफर कर दिया. इसके बाद परिजन मनीराम को रेहटी स्थित निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराने ले आए. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने प्रारंभ में मरीज की समस्या को सामान्य गैस से जुड़ी परेशानी बताया और उसी आधार पर इलाज शुरू किया. उनका कहना है कि इलाज के दौरान मरीज की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और कुछ समय बाद अचानक उनकी मौत हो गई. इससे परिजनों में आक्रोश फैल गया.
स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी. मौके पर थाना प्रभारी सहित पुलिस बल पहुंचा और आक्रोशित परिजनों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रण में लिया. साथ ही प्रभारी तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. प्रशासन की ओर से बताया गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा. यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. आमजन यह मांग कर रहे हैं कि मरीजों के उपचार में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. इस घटना के बाद एक बार फिर क्षेत्र में जारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सवालिया निशान लग गया है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से क्षेत्र में संचालित हो रहे निजी अस्पताल भोले- भाले ग्रामीणों की जिंदगी से खेल रहे हैं.
पिता का समुचित उपचार नहीं किया
इस मामले में मृतक के बेटे मुखीराम ने बताया कि वह शासकीय अस्पताल से पिता को निजी विजयासन अस्पताल लेकर आए थे. यहां पर एक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद वह नार्मल हो गए थे, लेकिन थोड़ी देर बाद अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई. फिर भी डॉक्टरों ने लापरवाही बरती और उनकी मौत हो गई.
प्रबंधन का कहना, मरीज को आया था हार्ट अटैक
मृत्यु की सूचना मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को बताया कि मरीज को हार्ट अटैक आया था, जिसके चलते उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हालांकि, परिजन इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए। उनका आरोप है कि यदि समय पर सही जांच और उपचार किया जाता तो मनीराम की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही बरतने और सही जानकारी न देने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया.
