नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बड़ा आदेश जारी करते हुए सभी सरकारी एजेंसियों को ‘एंथ्रोपिक’ (Anthropic) कंपनी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है। सरकार और एआई स्टार्टअप के बीच यह टकराव तब शुरू हुआ जब कंपनी के सीईओ डारियो अमोदेई ने पेंटागन को अपने एआई मॉडल ‘क्लॉड’ (Claude) का बिना किसी रोक-टोक के एक्सेस देने से इनकार कर दिया। एंथ्रोपिक ने चिंता जताई थी कि उनकी तकनीक का उपयोग सामूहिक निगरानी या घातक स्वायत्त हथियारों में किया जा सकता है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा और सेना के कामकाज में हस्तक्षेप करार दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका किसी ‘कट्टरपंथी कंपनी’ को यह तय करने की इजाजत नहीं देगा कि उसकी सेना कैसे युद्ध लड़ेगी। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एंथ्रोपिक को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ घोषित किया है, जो आमतौर पर दुश्मन देशों की कंपनियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। सरकार ने कंपनी पर भारी जुर्माना भी लगाया है और पेंटागन को इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए छह महीने का समय दिया है। आदेश में चेतावनी दी गई है कि यदि कंपनी ने सहयोग नहीं किया, तो उसे गंभीर दीवानी और आपराधिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
इस अभूतपूर्व फैसले ने पूरी सिलिकॉन वैली को चौंका दिया है। जहां ओपन एआई (OpenAI) और गूगल के कई वैज्ञानिकों ने एंथ्रोपिक के सुरक्षा रुख का समर्थन किया है, वहीं इस विवाद से एलन मस्क के चैटबॉट ‘ग्रोक’ (Grok) को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। पेंटागन अब मस्क की तकनीक को क्लासिफाइड मिलिट्री नेटवर्क में शामिल करने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अन्य एआई कंपनियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि उन्हें अमेरिकी रक्षा अनुबंधों के लिए सरकार की शर्तों और बिना शर्त एक्सेस की मांगों को स्वीकार करना ही होगा, अन्यथा वे भी ब्लैकलिस्ट हो सकते हैं।

