नई दिल्ली | भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ‘सॉवरेन एआई’ (Sovereign AI) रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में नीति निर्माताओं ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल एआई का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनेगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ऐसे एआई मॉडल विकसित करना है जिनका नियंत्रण और डेटा पूरी तरह भारत के पास हो। वर्तमान में उपयोग होने वाले चैटजीपीटी (ChatGPT) जैसे मॉडल विदेशी सर्वरों पर आधारित हैं, जबकि भारत का लक्ष्य हिंदी, तमिल और बंगाली जैसी स्थानीय भाषाओं को समझने वाले स्वदेशी मॉडल तैयार करना है जो भारतीय संस्कृति के अनुकूल हों।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली एआई बनाने के बजाए भारत ‘मिडलवेट’ मॉडल्स (30 से 105 बिलियन पैरामीटर) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। टेक विशेषज्ञों के अनुसार, ये मॉडल विशाल एआई की तुलना में काफी सस्ते और सटीक होते हैं, जो भारतीय स्टार्टअप्स और उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। स्वदेशी स्टार्टअप ‘सर्वम एआई’ (Sarvam AI) ने इस दिशा में बड़े कदम उठाते हुए अपने नए मॉडल पेश किए हैं। सरकार भी इस पहल को मजबूती देने के लिए ‘जीपीयू’ (GPU) इंफ्रास्ट्रक्चर खरीद रही है और स्टार्टअप्स को सस्ती दरों पर उपलब्ध करा रही है, ताकि संसाधनों की कमी बाधा न बने।
सॉवरेन एआई के सफल होने से आम आदमी के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। किसान अपनी स्थानीय भाषा में खेती की सटीक सलाह ले सकेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं में बीमारियों की जांच सस्ती व तेज हो सकेगी। हालांकि, इस राह में बिजली की खपत और उन्नत चिप्स (Chips) की उपलब्धता जैसी बड़ी चुनौतियां बरकरार हैं। भारत सरकार वर्तमान में एनवीडिया (NVIDIA) और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ मिलकर डेटा सेंटर बना रही है। भारत का विजन स्पष्ट है—तकनीक अपनी हो, डेटा अपना हो और तरक्की भी अपनी हो, जिससे भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भारत का एकाधिकार सुनिश्चित हो सके।

