सतना:स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से पिछडे विन्ध्य में देश और दुनिया के लिए परमधाम चित्रकूट में पूरा जीवन लोगों की सेवा करने वाले पद्मश्री डां बुधेन्द्र कुमार जैन ने अपने पचास साल की दीर्धकालीक सेवा में लाखों को जीवन का सबसे बड़ा उपहार नेत्र ज्योति देने के बाद शुक्रवार को प्रकाश पुंज की तरह हमेशा=हमेशा के लिए विलुप्त हो गए.उनकी अन्तेष्टी रविवार को सदगुरू नेत्र चिकित्सालय परिसर के प्रांगण में की जाएगी.
विन्ध्य को देश में सदगुरू नेत्र चिकित्सालय के माध्यम से अलग पहचान देकर वनवासी भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में सेवाभाव का प्रकल्प खड़ा कर लोगों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने वाले सतना के नगर सेठ के वारिस डां बी के जैन ने अपने जीवनकाल में कभी किसी को निराश नहीं किया.मन में सेवाभाव की ऐेसी सोच जिसने तमाम सुविधा होने के बाद भी जंगल,पहाडों के बीच रणछोड़दास जी महाराज ने जनसेवा का ऐसा मंत्र फूकां जिससे वे कभी मुक्त नहीं हो पाए.
रीवा मेडिकल कालेज से डाक्टरी की डिग्री हासिल करने के बाद मुबई से नेत्र चिकित्सा में विशेष डिग्री हासिल करने वाले डां जैन को बीते वर्ष भारत सरकार ने उनकी सेवाओं के लिए पदमश्री सम्मान से सम्मानित किया.72 वर्ष की उम्र में अपने सहयोगी साथियों से हमेशा=हमेशा के लिए विदा लेने वाले इस चिकित्सक ने लोगों को यही सीख दी की सुविधा में सभी का बराबर हक है.वह चाहे सम्पन्न हो या विपन्न.उनके जाने से विन्ध्य के चिकित्सा क्षेत्र में जो रिक्तता पैदा हुई है.उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती.उन्होने अपने प्रयासों से चित्रकूट जिले में अंधत्व निर्वाण अभियान चलाकर मोतियाबिन्द मुक्त जिला घोषित कराया.
