
भोपाल। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि विधानसभा में जनहित के मुद्दे उठाए जाने पर सरकार जवाबदेही से बचती है और अहंकारपूर्ण रवैया अपनाती है।
सिंघार ने कहा कि जब विपक्ष ने इंदौर में दूषित पानी से कथित तौर पर 35 लोगों की मौत का मामला उठाया, तो सरकार ने जवाब देने के बजाय “औकात याद दिलाने” की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि यही स्थिति तब भी बनी जब कांग्रेस विधायकों ने स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पर चर्चा की मांग की और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में उजागर कथित अनियमितताओं पर बहस कराने की बात कही।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश पर कर्ज़ बढ़कर लगभग छह लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने सवाल किया कि बिना पारदर्शी कारण बताए कर्ज़ क्यों लिया जा रहा है और उसकी अदायगी के लिए आम नागरिकों पर करों का बोझ क्यों डाला जा रहा है। सिंघार ने बजट पर सार्थक चर्चा से बचने और सही जानकारी उपलब्ध न कराने के लिए भी सरकार की आलोचना की।
धिरौली की 2,762 हेक्टेयर कोयला परियोजना का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापन झेल रहे आदिवासी परिवारों की अनदेखी कर नियमों को दरकिनार करते हुए भूमि आवंटित की गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक दल आगे भी जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाता रहेगा और विधानसभा को “लोकतंत्र का मंदिर” बताते हुए कहा कि दलगत सीमाओं से ऊपर जनता ही सर्वोपरि है।
