नयी दिल्ली, 27 फरवरी (वार्ता) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली की जनता के गुनाहगार हैं।
श्रीमती गुप्ता ने आज कहा कि श्री केजरीवाल के कार्यकाल में सामने आए कथित शराब घोटाले के मामले में निचली अदालत द्वारा दिया गया फैसला अंतिम सत्य नहीं है, बल्कि यह केवल कानूनी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। सच्चाई का फैसला होकर रहेगा, इसलिए श्री केजरीवाल घड़ियाली आंसू न बहाएं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, ” हम न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं और अदालतों के निर्णयों का आदर करते हैं। आम आदमी पार्टी इस फैसले को ‘क्लीन चिट’ बताकर जनता को गुमराह कर रही है। अदालत ने अपने आदेश में ‘साक्ष्य के अभाव’ की बात कही है। साक्ष्य पर्याप्त न होना और पूरी तरह बेगुनाह होना दो अलग बातें हैं। कानून की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और मामला उच्च न्यायालय में जा सकता है।” उन्होंने कहा कि वह कुछ सीधा सवाल रखना चाहती हैं, जिनका जवाब दिल्ली की जनता को मिलना चाहिए।
उन्होंने प्रश्न किया कि अगर शराब नीति इतनी ही शानदार और राजस्व बढ़ाने वाली थी, तो जांच शुरू होते ही उसे वापस क्यों लिया गया। नयी नीति रद्द कर पुरानी नीति पर यू-टर्न क्यों लिया गया। यदि नीति में कोई खामी नहीं थी तो उसे जारी क्यों नहीं रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि थोक मुनाफा पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत क्यों किया गया। इससे लाभ किसे हुआ। लाइसेंस संरचना में ऐसे बदलाव क्यों किए गए, जिन पर गंभीर सवाल उठे। किन परिस्थितियों में यह बदलाव किए गए और उनका वास्तविक लाभार्थी कौन था, इसका जवाब पूर्व मुख्यमंत्री को देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि लगभग 200 दिनों की अवधि में 160 से 170 मोबाइल फोन बदले गए। इतनी बड़ी संख्या में फोन बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी। डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर सवाल क्यों खड़े हुए। यदि छिपाने जैसा कुछ नहीं था तो ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न ही क्यों हुईं। यह सब अपने आप में गंभीर संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि शीर्ष न्यायालय ने पहले अपने आदेशों में बड़े पैमाने पर धन लेन-देन के प्रथम दृष्टया संकेतों का उल्लेख किया था। इसी प्रकार दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इस मामले को गंभीर माना था।
श्रीमती गुप्ता ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट में हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान की बात सामने आई है। वह पैसा दिल्ली की जनता का है। जनता का भरोसा किसी भी सरकार की सबसे बड़ी पूंजी होता है। यदि उस भरोसे को ठेस पहुंची है तो जवाबदेही तय होना आवश्यक है। यदि कोई स्वयं को कट्टर ईमानदार कहता है, तो जांच से भागने के आरोप क्यों लगे। समन को नजरअंदाज करने की खबरें क्यों आईं। कट्टर ईमानदार नेता सवालों से भागता नहीं, बल्कि उनका सामना करता है और जवाब देता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने अपना राजनीतिक फैसला पहले ही दे दिया है। अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उच्च अदालतें साक्ष्यों की फिर से जांच करेंगी और तथ्य सामने आएंगे। हमें न्यायिक व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि कानून का सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है, लेकिन जवाबदेही से कोई भी ऊपर नहीं है। सत्य सामने आएगा और अंतिम फैसला अभी बाकी है।
