आत्मा के उत्थान के लिये मनुष्य जीवन; जिसका सार अर्थ, व्यर्थ या अनर्थ

भोपाल। मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने 1100 क्वार्टर में प्रवचन देते हुए जीवन को अर्थ, व्यर्थ या अनर्थ न बनने देने की सीख दी। उन्होंने एक प्रेरक कथा के माध्यम से समझाया कि धन का सदुपयोग ही जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है। नोबेल शांति पुरस्कार के प्रणेता अल्फ्रेड नोबेल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि आत्मचिंतन से जीवन दिशा बदलता है। मुनि श्री के 59वें अवतरण दिवस पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण शुद्धि का संदेश दिया गया। प्रवचन व शंकासमाधान कार्यक्रम प्रतिदिन होंगे। सभी को धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया।

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