
जबलपुर। सम्पति संबंधित विवाद के कारण पिता को पुत्र द्वारा नशा मुक्ति केंद्र में बंधक बनाकर रखे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने बंधक पिता को पेश करते हुए उसकी मेडिकल रिपोर्ट पेश की। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि बंधक कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित है। युगलपीठ ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज में स्थित नशा मुक्ति मेडिकल ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर में रखकर उपचार के आदेश जारी किये है।
जबलपुर निवासी अक्षय चौधरी की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि दुर्गेश पटेल के पास काम करता है। उनके पुत्र रूपेश पटेल ने पिता दुर्गेश पटेल को जबरन नशा मुक्ति केंद्र में बंधक बनाकर रखा है। हाईकोर्ट के आदेश पर विगत 26 फरवरी को तिलवारा पुलिस ने वृध्द को हाईकोर्ट में पेश किया था। वृध्द ने युगलपीठ को बताया था कि वह कोई साइकोट्रोपिक सब्सटेंस नही लेते है और प्रॉपर्टी के झगड़े की वजह से उसे नशा मुक्ति केंद्र में रखा है। कोर्ट में अनावेदकों की तरफ से बताया गया कि वह भू-माफिया के प्रभाव में है जो प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा करना चाहते हैं। युगलपीठ ने पुलिस जांच अधिकारी को वृद्ध की मेडिकल जांच नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, डॉक्टर वोर्ड से करवाने के आदेश जारी किये थे।
याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गयी। मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि वृध्द कई गंभीर से पीड़ित है और उसकी विस्तृत जांच आवश्यक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हॉस्पिटल में एक नशा मुक्ति मेडिकल ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर है, जो नई दिल्ली में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के साथ कोऑर्डिनेशन में चलाया जाता है। रिपोर्ट में सिफारिश की वृद्ध को उसकी हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाए। युगलपीठ ने सभी पक्षों की सहमति के बाद मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वृद्ध को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में भर्ती कराया जाए। याचिका पर अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गयी है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा , अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की।
