बजट पर पहली वेबीनार: मोदी ने दिया बाँड बाजार के विस्तार की जरूरत पर बल

बजट पर पहली वेबीनार: मोदी ने दिया बाँड बाजार के विस्तार की जरूरत पर बल

नयी दिल्ली , 27 फरवरी (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ उद्योग और वित्तीय क्षेत्र को गति देने की जरूरत पर विशेष बल देते हुए कहा है कि दीर्घकालिक कर्ज की सुविधा बढ़ाने के लिए बांड बाजार को और विस्तृत बनाने के कदम उठाये जाने चाहिए। श्री मोदी ने बजट 2026-27 पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े वेबीनारों की परम्परागत श्रृंखला प्रारंभ करते हुए इस वर्ष के पहले वेबीनार में शुक्रवार को कहा, “अब समय आ गया है कि उद्योग और वित्तीय संस्थान भी नई ऊर्जा के साथ आगे आएं। हमें अवसंरचना में ज्यादा भागीदारी चाहिए, वित्त-पोषण के लिए अपनाए जाने वाले मॉडल में ज्यादा नवाचार चाहिए, और उभरते क्षेत्रों में ज्यादा मजबूत सहयोग चाहिए ।” उन्होंने उद्योग जगत सहित सभी हितधारकों को बजट से उत्पन्न अवसरों को जमीन पर उतारने के लिये काम करने का आह्वान किया। ‘विकसित भारत के लिये प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त ” विषय पर वित्त मंत्रालय द्वारा आयोजित इस वेबीनार का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार विदेशी निवेश के नियमों को सरल बनाते हुए प्रयास कर रही है कि पूरी प्रणाली को अधिक स्पष्ट और निवेशकों के अधिक अनुकूल हो। वेबीनार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन भी उपस्थित थीं। उन्होंने कहा, ” हम दीर्घकालिक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए, बाँड बाजार को और ज्यादा सक्रिय बनाने की दिशा में भी कदम उठा रहे हैं और बॉन्ड की खरीद और बिक्री की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ” हमें बॉंड बाजार में सुधार को दीर्घकालिक वृद्धि में सहायक उपाय के रूप में देखना होगा, हमें पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी, बाँड बाजार में तरलता (बाँड बेचने की सुविधा) का विस्तार करना होगा, नये इंस्ट्रूमेंट (खरीद-बिक्री योग्य नयी प्रतिभूतियां) लाने होंगे, और जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन करना होगा। तभी हम बाजार में निरंतर पूंजी का प्रवाह आकर्षित कर पाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा, ” मुझे अपेक्षा है कि आप दुनिया में चल रही अच्छी परिपाटियों से सीख लेकर विदेशी निवेश के नियमों और बाँड के बाजारों को मजबूत करने के लिए स्पष्ट और ठोस सुझाव देंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ इस दिशा में मेरा एक और सुझाव है, हमें परियोजनाओं की मंजूरी की पद्धति और आकलन की गुणवत्ता को और मजबूत करना होगा। हमें लागत-लाभ विश्लेषण और परियोजना के जीवन काल की लागत के विचार को सर्वोपरि रखते हुए अपव्य और विलंब पर रोक लगानी होगी।” उन्होंने कहा कि नीतियों की सफलता उद्योग जगत के साहस और नवाचार से तय होती है। उद्योग जगत को नये निवेश और नवाचार के साथ आगे आना होगा। वित्तीय संस्थानों और विश्लेषकों को व्यावहारिक समाधान , तैयार करने में मदद करनी होगी और बाजार के विश्वास को मजबूत करना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब सरकार, उद्योग जगत और विषयों की विशेषज्ञता रखने वाले साझेदार एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी सुधार के परिणाम सामने आते हैं और घोषणाएं जमीन पर उपलब्धियां बन जाती हैं।

श्री मोदी ने ‘सुधार के लिए साझेदारी का एक स्पष्ट चार्टर” विकसित करने का सुझाव देते हुए कहा कि यह चार्टर ‘ सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थान और अकादमिक क्षेत्र का साझा संकल्प होना चाहिए। ऐसा चार्टर, विकसित भारत की यात्रा का बहुत अहम दस्तावेज बनेगा।” प्रधानमंत्री ने सभी हितधारकों से बजट 2026-27 में उपलब्ध कराये गये अवसरों का फायदा उठाने, नये अवसरों के साथ गहराई से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों की भागीदारी से योजनाओं का कार्यान्वयन और बेहतर होगा। कार्यान्वयन के दौर में हितधारकों के सुझावों और सहयोग से नतीजे बेहतर होंगे। उन्होंने कहा, ” आइए, हम सब मिलकर सुधार करें, आगे बढ़कर ऐसा भविष्य बनाएं, ताकि विकसित भारत का सपना जल्द से जल्द साकार हो।” अपने संबोधन के शुरू में श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय बजट कोई अल्पकालिक व्यापार योजना का दस्तावेज नहीं होता, वह एक नीतिगत वृहद योजना का हिस्सा होता है। बजट में ऐसी नीतियां और निर्णय होने चाहिए जो अवसंरचना का विस्तार करें, जो कर्ज प्रवाह को आसान बनाएं, जो कारोबार में आसानी बढ़ाएं, राजकाज में पारदर्शिता बढ़ाएं, जनता का जीवन आसान बनाएं और उनके लिए नये-नये अवसर बनायें। इससे अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि किसी भी बजट को अलग-थलग नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्र निर्माण एक निरंतर प्रक्रिया होती है। हर बजट एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने का एक चरण होता है, और हमारे सामने वो बड़ा लक्ष्य है साल 2047, 2047 तक विकसित भारत का निर्माण।

उन्होंने कहा, ” हर सुधार, हर आवंटन, हर बदलाव को इस लंबी यात्रा के हिस्से के रूप में ही देखा जाना चाहिए। और इसलिए, हर साल बजट के बाद होने वाले ये वेबिनार बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।” श्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह, डिजिटल नेटवर्क, बिजली प्रणालियों, ऐसे अनेक और इस तरह की अनेक ठोस परिसम्पत्तियां तथा अवसंरचानाओं के विकास पर सरकार का बहुत फोकस रहा है। ये परिसम्पत्तियां आने वाले कई दशकों तक उत्पादकता बढ़ाती रहेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अवसंरचना विकास को प्राथमिकता का प्रमाण है कि 11 साल पहले बजट में जो सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का था वह अब बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपए से ऊपर हो गया है। इतने बड़े पैमाने पर सरकारी निवेश होना निजी क्षेत्र के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि इस वेबीनार में हितधारकों के बीच गहन मंथन होगा तथा प्रक्रियाओं को सरल करने पर आपका ध्यान केंद्रित होगा क्योंकि इस मंथन का मकसद बजट के प्रस्तावों को जमीन पर उतारना है। श्री मोदी ने याद दिलाया कि अब यह बजट की चर्चा के लिए कार्यक्रम नहीं है, अब बजट में जो है उसको जमीन पर जल्दी से जल्दी उतारने, सरल से सरल मार्ग से उतारने और सबके, सभी हितधारकों के लिए इसका लाभ उठाने पर चर्चा का कार्यक्रम है।

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