“सपनों की दुनिया” में जी रहा है पाकिस्तान – संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार

जिनेवा/नई दिल्ली, 26 फरवरी (वार्ता) भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान के “भ्रम” में रहने और “सपनों की दुनिया” में जीने पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का बजट इस्लामाबाद के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से हाल ही में मांगे गए बेलआउट पैकेज से दोगुने से भी अधिक है।

भारत ने पाकिस्तान को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को खाली करने के लिए भी कहा और स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र के संबंध में एकमात्र विवाद पाकिस्तान का भारतीय क्षेत्रों पर किया गया अवैध कब्जा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव सुश्री अनुपमा सिंह ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें नियमित सत्र के उच्च-स्तरीय खंड में भारत के ‘जवाब देने के अधिकार’ का उपयोग करते हुए, कहा कि निरंतर राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के माध्यम से क्षेत्र को अस्थिर करने के पाकिस्तान के प्रयासों के बावजूद, जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ रहा है।

सुश्री सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने गहराते आंतरिक संकटों को ठीक करने पर ध्यान केंद्रित करे, न कि इस तरह के मंच पर आडंबरपूर्ण तरीके से उन्हें छिपाने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि दुनिया निश्चित रूप से उसके इस नाटक को समझ सकती है।

उन्होंने कहा, “यदि पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर में जिस पुल का उद्घाटन हुआ वह दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, चिनाब रेल ब्रिज, फर्जी है, तो पाकिस्तान निश्चित रूप से भ्रम का शिकार है या सपनों की दुनिया में जी रहा है। पाकिस्तान को यह अविश्वसनीय लगता है कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट उनके आईएमएफ से मांगे गए हालिया बेलआउट पैकेज से दोगुने से भी अधिक है।” उन्होंने कहा कि वास्तव में, इस क्षेत्र के संबंध में एकमात्र विवाद पाकिस्तान का भारतीय क्षेत्रों पर किया गया अवैध कब्जा है। उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तान से इन क्षेत्रों को खाली करने का आह्वान करते हैं, जो उसके जबरन कब्जे में हैं।”

लोकतंत्र में पाकिस्तान के खराब रिकॉर्ड के लिए उस पर प्रहार करते हुए सुश्री सिंह ने कहा कि उस देश से लोकतंत्र पर व्याख्यान लेना कठिन है जहां नागरिक सरकारें शायद ही कभी अपना कार्यकाल पूरा करती हैं।

सुश्री सिंह ने कहा, “उनके दावे खोखले हैं। जम्मू-कश्मीर में आम चुनाव और विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान इस बात का प्रमाण है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने पाकिस्तान की आतंकवाद और हिंसा की विचारधारा को खारिज कर दिया है और वे विकास तथा लोकतंत्र के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।”

 

 

 

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