कोलंबो, 25 फरवरी (वार्ता) श्रीलंका के आपराधिक जांचकर्ताओं ने 2019 के ईस्टर संडे बम धमाकों के संबंध में देश के पूर्व खुफिया प्रमुख को गिरफ्तार किया है। इन धमाकों में 45 विदेशियों सहित 279 लोग मारे गये थे। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि सेवानिवृत्त मेजर जनरल सुरेश साले को बुधवार तड़के कोलंबो के एक उपनगर से हिरासत में लिया गया। यह काफी लंबे समय से जारी इस जांच में अब तक की सबसे हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी है। श्रीलंका की पूर्व सरकार, जिसका नेतृत्व कद्दावर राष्ट्रपति नंदसेना गोटाबाया राजपक्षे कर रहे थे, पर इस भीषण आतंकवादी हमले की जांच में बाधा डालने के आरोप लगते रहे हैं। इसके साथ ही यह दावे भी किये गये थे कि उन्होंने सत्ता में वापसी के लिए इस संकट का फायदा उठाया था।
राजपक्षे परिवार ने 2005 से लगभग एक दशक तक श्रीलंका की राजनीति पर अपना दबदबा बनाये रखा। जहां उन्हें देश के 26 साल पुराने गृहयुद्ध को समाप्त करने का श्रेय दिया गया, वहीं उनका कार्यकाल आलोचकों और पत्रकारों को चुप कराने के लिए ‘डेथ स्क्वाड’ के कथित उपयोग सहित सत्तावादी हथकंडों के लिए भी जाना गया। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद 2015 में महिंदा राजपक्षे को पद से हटा दिया गया था, लेकिन परिवार ने 2019 में राजनीतिक वापसी की कोशिश की। श्री गोटाबाया राजपक्षे के राष्ट्रपति बनने के बाद 2019 में सुरेश साले को सरकारी खुफिया सेवा (एसआईएस) का प्रमुख नियुक्त किया गया था। उन पर इन समन्वित आत्मघाती हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है, जिसे उन्होंने सिरे से नकारा है। ईस्टर संडे 2019 के दिन छह आत्मघाती हमलावरों ने श्रीलंका के चर्चों और लक्जरी होटलों को निशाना बनाया था, जिसमें आठ ब्रिटिश पर्यटकों सहित 269 लोग मारे गये थे।

