नयी दिल्ली, 24 फरवरी (वार्ता) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि पर्यटन संस्कृतियों के बीच एक सेतु, आर्थिक अवसरों का एक चालक और सौम्य कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन है। श्री राधाकृष्णन ने मंगलवार को यहां यूएस-इंडिया पार्टनरशिप फोरम द्वारा आयोजित पर्यटन लीडरशिप शिखर सम्मेलन में आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक ऐसा मंच तैयार किया है जो भारत-अमेरिका आर्थिक गलियारे को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करने वाला है। उन्होंने कहा कि पर्यटन एक उद्योग से कहीं अधिक है। उन्होंने पर्यटन को संस्कृतियों के बीच एक सेतु, आर्थिक अवसरों का चालक और सौम्य कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन बताया है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच पर्यटन गहरे जन-संबंधों, साझा मूल्यों, उद्यमशीलता की भावना और प्रवासी भारतीय समुदाय की जीवंतता को दर्शाता है।
उन्होंने भारत की दूरदर्शी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत ने पर्यटन विजन 2029 की घोषणा की है जिसका उद्देश्य हर राज्य में मजबूत बुनियादी ढांचे और वैश्विक स्तर की मेहमान नवाजी के साथ कम से कम एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल विकसित करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्बाध संपर्क, आधुनिक सुविधाओं, सुरक्षा, स्थिरता, डिजिटल एकीकरण और समृद्ध पर्यटक अनुभवों के साथ समग्र पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश वैश्विक स्तर पर पर्यटन को नई परिभाषा देने के लिए तैयार है। उन्होंने उन्नत पर्यटक सुविधाओं, व्याख्या केंद्रों, अंतिम छोर तक बेहतर संपर्क सुविधा, सतत विकास पद्धतियों और डिजिटल माध्यमों के जरिए भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण और विश्व स्तरीय विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया है।
उन्होंने पर्यटन को रोजगार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बताते हुए समावेशी और समुदाय-संचालित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण, उद्यमिता और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों में अधिक निवेश करने का आह्वान किया। श्री राधाकृष्णन ने आशा व्यक्त की कि यह शिखर सम्मेलन भारत-अमेरिका सहयोग में एक नया अध्याय शुरू करेगा जो स्थिरता, नवाचार, समावेशिता और साझा समृद्धि द्वारा परिभाषित होगा।

