टीकमगढ़: शहर में पाल समाज ने मृत्यु के बाद होने वाले तेरहवीं संस्कार को बंद करने का फैसला लिया है। समाज ने तय किया है कि अब त्रयोदशी के दिन मृत्यु भोज के बजाय केवल शोक सभा का आयोजन किया जाएगा।यह निर्णय ग्राम मानिकपुरा के 35 साल के राकेश पाल के निधन के बाद आयोजित उनकी शोक सभा में लिया गया। समाज के लोगों ने माना कि तेरहवीं के आयोजन के लिए कई परिवारों को कर्ज लेना पड़ता है, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। रामेश्वर पाल ने कहा कि इस कुरीति को खत्म करने से शोकाकुल परिवारों पर पड़ने वाला अनावश्यक आर्थिक बोझ कम होगा।शोक सभा के दौरान शिक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। ललितपुर के जिलाध्यक्ष बाबूलाल पाल और हाकम पाल ने कहा कि एक संगठित और उन्नत समाज के
लिए बच्चों को पढ़ाना अनिवार्य है। युवा जिलाध्यक्ष हरदयाल सिंह पाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आगे आएं और समाज में व्याप्त ऐसी रूढ़िवादी प्रथाओं को जड़ से समाप्त करने में मदद करें। आयोजित इस शोक सभा में समाज के लोगों ने दिवंगत आत्मा इस अवसर पर हीरालाल पाल, अखलेश पाल, सरमन पाल, मुन्ना पाल और राजपाल को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सिंह सहित बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में समाज सुधार के इस नए संकल्प का समर्थन किया। शहर में पाल समाज ने मृत्यु के बाद होने वाले तेरहवीं संस्कार को बंद करने का फैसला लिया है। समाज ने तय किया है कि अब त्रयोदशी के दिन मृत्यु भोज के बजाय केवल शोक सभा का आयोजन किया जाएगा।
