अपने मन को ईश्वर को समर्पित करें मन अपने आप स्थिर हो जाएगा : देवी रत्नमणि द्विवेदी

इटारसी। नगर के समीप स्थित तारारोड़ा ग्राम में श्रीमद् भागवत कथा में व्यासपीठ पर विराजमान श्रीधाम वृंदावन की देवी रत्नमणि द्विवेदी ने कथा के छठवें दिन गोपी गीत, महारास, रुक्मिणी मंगल विवाह एवं प्रेम योग के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए महारास के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि महारास का अर्थ जीव से जीव का मिलन नहीं अपितु ब्रह्म से जीव के मिलन को महारास कहा गया है। रुक्मिणी मंगल कथा के बारे में बताते हुए कहा कि जो इसका श्रवण करता है, उसके घर में विवाह की सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं और परिवार मंगलमय जीवन व्यतीत करता है।

महिला मंडल की अध्यक्ष भारती चौधरी ने बताया कि शनिवार को कथा की पूर्णाहुति होगी। इसके साथ कन्या भोजन प्रसादी वितरण एवं भंडारे का आयोजन भी रखा गया है। भागवत कथा में सजी रुक्मिणी विवाह उत्सव की झांकी और भाव विभोर होकर नृत्य करते श्रद्धालु नृत्य करने लगे। मैं तो सुन मुरली की तान दौड़ आई सांवरिया… जैसे भजन का भक्तों ने आनंद लिया। साथ में ब्रज की होली का आयोजन किया जिसमें ग्रामीणों ने फूलों से होली खेली।

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